September 26, 2024
BY Brij Chandrarav
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।। अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोध: ।।
Practice and detachment are key to controlling the mind.
अभ्यास और वैराग्य मन को नियंत्रित करने की कुंजी हैं।
'अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः' यह एक योगसूत्र है। इसका अर्थ है; अभ्यास और वैराग्य से चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है। थोडा विस्तार से अर्थ को समझने का प्रयास है;
१ 'अभ्यास' का अर्थ है किसी काम को बारबार करना..प्रेक्टिस।२ 'वैराग्यभ्याम्' का अर्थ है इच्छाशून्यता से, अनासक्ति से..!
३ 'तद्'...