April 01, 2026
BY Brij Chandrarav0
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Change yourself the world will change.
हमारे महात्मा गांधी की "खुद को बदलो, दुनिया बदलेगी" यह सैद्धांतिक रूप की मान्यता है।
Your own resonance can alter the world around you.
आपकी स्वयं की प्रतिध्वनि आपके आस-पास की दुनिया को बदल सकती है।
इसे पढ़कर मस्तिष्क में झनझनाहट पैदा होती है तो आगे पढ़ना जरुरी हैं। बात शुरु करने से पहले मैं कुछ ऐसा कहता हूँ। क्योंकी ये बात आगे पढने से समझ में आ जाएगी।
उल्लू बनो...!
अरे भाई क्यो बनना हैं उल्लू ?
संसार में उल्लू एक ऐसा पक्षी है जिसे दिन कि अपेक्षा रात में अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ता है। उन्हें रात का पक्षी (Nocturnal Birds) कहा जाता हैं। अपनी बड़ी आंखे उसकी पहचान हैं। जैसे बड़ी आंखें बुद्धिमान व्यक्ति की निशानी होती है। वैसे उल्लू को भी बुद्धिमान माना जाता है। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है पर कुछ प्रचलित पौराणिक मान्यतावाली कहानियों में उल्लू को बुद्धिमान माना गया है। एक ओर विशेषत में उल्लू अपनी गर्दन पूरी तरह से घुमा सकता है। इसके कान बेहद ही संवेदनशील होते हैं। रात में जब कोई शिकारी जानवर थोड़ी-सी भी हरक़त करता है, तो इसे तुरंत पता चल जाता है। और उसे वो दबोच लेता है। इसके पैरों में नाखूनों-वाली चार अंगुलियां होती हैं। इसके कारण शिकार को दबोचने में उसे विशेष सुविधा मिलती है। चूहे इसके विशेष शिकार होते हैं।
प्राचीन यूनानियों में बुद्धि की देवी, एथेन के बारे में कहा जाता है कि वह उल्लू का रूप धारण करके पृथ्वी पर आई हैं। भारतीय पौराणिक कहानियों में भी यह उल्लेख मिलता है कि उल्लू धन की देवी 'लक्ष्मीमाता' का वाहन है। हिन्दू संस्कृति में माना जाता है कि उल्लू समृद्धि और धन लाता है। एक ओर भी मान्यता चल रही है कि इन्सान की मृत्यु का समय उल्लू को पहले से पता चल जाता है। और तब वो आसपास के पेड़ो पर अक्सर आवाज़ लगाने लग जाते हैं।
एक तो उल्लू निशाचर पंछी है, जो अपनी बड़ी आँखे और गोल चेहरे के कारण बहुत प्रसिद्ध है। साथ में उल्लू के पंख बहुत ही मुलायम होते हैं, इसके कारण रात के सन्नाटे में उड़ते समय आवाज़ नहीं होती। ये बहुत ही कम रोशनी में भी देख लेते हैं। रात में उड़ान और शिकार में उसे कोई परेशानी नहीं होती। धरती पर जैविक संतुलन बनाने में उल्लू की अहम भूमिका है। चूहे-छछूंदर और हानिकारक कीड़े मकोड़ों का शिकार करने के कारण इन्हें प्रकृति के 'सफाईकर्मी भी कहेते हैं। शायद इसी कारण हमारे पड़ोसी देश मलेशिया में किसान फसल बचाने के लिए उल्लू पालते हैं।
उल्लू अन्धकार में स्पष्ट देख सकता हैं और अपनी दिशा तय कर सकता है। वह संसार के शोर से दूर रहकर अपने भीतर के अंधकार को देखता है। यह बताता है कि वास्तविक बुद्धिमत्ता जो अंधकार यानि अज्ञानता में से प्रकट होती हैं। संकट में से सही निर्णय लेने को बुद्धिमत्ता कहते हैं। साथ ही उल्लू शांत, धैर्यवान और एकाग्रचित होता है। इस बात के साथ हम थोड़ी सहमति जताए तो...धन प्राप्ति के लिए विवेक-धैर्य और मौन का बड़ा महत्व हैं। चुपचाप कर्म करो और अंधकार में से प्रकाश खोजने की मनसा रखो। इस तरह उल्लू तो शक्ति और दूरंदेशी का प्रतीक हैं, ऐसा समज में आता है। माता लक्ष्मीजी ने उल्लू को अपना वाहन क्यों बनाया हैं ? अब ये सहज ही समझ में आ जाएगा।
अपने जीवन के ध्वनि को सुनना हैं तो शांत बनना पड़ेगा। मैं संसार को बदलने के लिए नहीं निकला हूँ। मैं खुद को बदलने निकला हूँ। इस प्रक्रिया के दौरान जो कुछ परिवर्तन आते हैं उसे शांत होकर आनंद पूर्वक स्वीकार करना हैं। इससे बाहरी दुनिया में क्या परिवर्तन आते हैं उससे मुझे अधिक निस्बत नहीं हैं। मुझे Change ourselves खुद को बदलें में आनंद मिलता हैं। मैं इसे जीवन का मूलभूत आनंद कहते हुए मन से भर रहा हूं।
उल्लू की अपनी निजी दुनिया हैं, अंधकार से भरी तो अंधकार से...! लेकिन अपनी दृष्टि को स्थिर रखना-स्पष्ट रखना ये बहुत जरुरी हैं। शांत होकर स्वयं अपने भीतरी ध्वनि को पकड़ना हैं। ईश्वर ने मुझे जो कुछ क्षमताएँ दी हैं, वही मेरी मूलभूत शक्ति हैं। खूद को महसूस करना हैं। अँधेरे से डरना नहीं है, अँधेरे में छुपे उजियारे को महसूस करना हैं। प्रकृति के शांत स्वर में अपनी उड़ान को खोजना हैं। ये सब करनेवाला एक छोटा-सा पंछी उल्लू हैं...! इसीलिए मुझे उल्लू बनना हैं। हां, मैं उल्लू हूं उल्लू बनना चाहता हूं !!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat. INDIA
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