June 19, 2026
BY Brij Chandrarav0
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'द बर्ड ऑफ टाइम'
अरे ओ ! समय के पंछी...!
आज भारत के एक पुलकित जीवन पर आधारित ब्लॉग कर रहा हूं। पहले उस महान चरित्र की एक सुप्रसिद्ध कृति का आस्वादन करते हैं।
O Bird of Time on your fruitful bough
What are the songs you sing?...
Songs of the glory and gladness of life.
of poignant sorrow and passionate strife.
and the lilting joy of the spring;
of hope that sows for the years unborn,
and faith that dreams of a tarrying morn
The fragrant peace of the twilight's breath
and the mystic silence that men call death,
O Bird of Time, say where did you learn
The changing measures you sing?...
In blowing forests and breaking tides.
In the happy laughter of new-made brides,
And the nests of the new-born spring;
In the dawn that thrills to a mother's prayer,
And the night that shelters a heart's despair.
In the sigh of pity, the sob of hate
And the pride of a soul that has conquered fate.
By Sarojini Naidu (13 February 1879 - 2 March 1949)
अरे ! समय के पंछी..!
अपनी फलदार टहनी पर तुम कौन से गीत गाते हो ?
जीवन की शान और खुशी के गीत।
गहरे दु:ख और ज़बरदस्त संघर्ष के गीत।
और बसंत की मस्ती भरी खुशी के गीत;
उस उम्मीद के गीत जो आने वाले सालों के लिए बीज बोती है,
और उस भरोसे के गीत जो एक नई सुबह का सपना देखता है।
शाम की हवाओं में घुली खुशबू भरी शांति,
और वह रहस्यमयी खामोशी जिसे लोग मौत कहते हैं।
अरे ! समय के पंछी..!
बताओ तुमने कहाँ से सीखे ये बदलते सुर जो तुम गाते हो ?
लहराते जंगलों और उठती-गिरती लहरों में।
नई-नवेली दुल्हनों की खुशमिज़ाज हँसी में,
और बसंत के नए-नए बने घोंसलों में;
उस सुबह में जो माँ की प्रार्थना से खिल उठती है,
और उस रात में जो दिल की मायूसी को पनाह देती है।
दया की आह में, नफ़रत की सिसकी में,
और उस आत्मा के गर्व में जिसने किस्मत को जीत लिया है।
सरोजिनी नायडू द्वारा (13 फरवरी 1879 - 2 मार्च 1949)
आज एक पुलकित जीवन पर और उस चरित्र की उपलब्धियों के प्रमुख पहलू पर थोड़ा-बहुत प्रकाश डालता हूं। उनका नाम हैं, सुश्री सरोजिनी नायडू। उनका जन्म १३ फरवरी १८७९ को तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में हुआ था। एक बंगाली परिवार में जन्मीं नायडू ने मद्रास और बाद में लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त की थी। अभ्यास काल में ही उन्होंने ब्रिटेन में 'मताधिकार आंदोलन' में भाग लिया था। यह उनके उभरते नेतृत्व की पहचान कही जा सकती हैं।
वो भारत की एक महान स्वतंत्रता सेनानी थी। प्रसिद्ध कवयित्री और राजनेता भी थी। वो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष १९२५ में बनी थी। १९४७ में स्वतंत्रता के बाद वो स्वतंत्र भारत के उत्तर प्रदेश राज्य की पहली महिला राज्यपाल भी बनी थी। इतिहास के पन्नो पर लिखी गई यह दो अभूतपूर्व घटनाएं कही जा सकती हैं।
महात्मा गाधीने उनको 'भारत कोकिला' Nightingale of India नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' कहकर सम्मान दिया हैं। कवयित्री के रूप में नायडू के साहित्यिक रचनाओं में बच्चों के लिए लिखी गई कविताएँ और देशभक्ति एवं त्रासदी जैसे गंभीर विषयों पर लिखी गई कविताएँ दोनों शामिल हैं। उनको "भारत की कोकिला" का उपनाम इसलिए दिया गया क्योंकि उनकी कविताओं में रंग, बिम्ब और गीतात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिलता था। उनके पिताजी का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक प्रसिद्ध विद्वान और माँ कवयित्री थीं। उन्हें एक विपुल कवयित्री के रूप में भी पहचाना जाता है। उनके प्रसिद्ध कविता ग्रंथ संग्रहों में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' (१९०५), 'द बर्ड ऑफ टाइम' (१९१२) और 'इन द बाज़ार्स ऑफ़ हैदराबाद' शामिल हैं।
उनका राजनीतिक और सामाजिक जीवन बड़ा ही शानदार रहा हैं। उन्होंने
१९२५ में हुए कानपुर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता की थी। वह इस पद पर आसीन होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थी। परतंत्रता काल में उनकी यह सिद्धी असाधारण कहीं जाती हैं। उन्होंने महात्मा गांधीजी के साथ 'नमक सत्याग्रह' और 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' में सक्रिय भाग लेकर कई बार जेलवास किया था। लखनऊ में दिल का दौरा पड़ने के कारण २ मार्च १९४९ को उनका निधन हुआ था। भारत में आज भी उनके जन्मदिवस १३ फरवरी को 'राष्ट्रीय महिला दिवस' के रूप में मनाया जाता है। ये उनकी राष्ट्रभक्ति को महसूस करने का अवसर भी कहा जा सकता हैं। महिला-नेतृत्व के लिए सुश्री सरोजिनी नायडू एक अभूतपूर्व सिमास्तंभ हैं।
आज इस ब्लोग में केवल सुश्री सरोजिनी नायडू के बारे में विकीपीडिया जैसे कुछ माध्यमो से प्राप्त की हुई अलपझलप देखते हैं। उनकी बहतरीन फिलासफी को महसूस करने के लिए दूसरा ब्लोग लिखूँगा। आज बस इतना ही..!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat, INDIA.
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