January 20, 2026
BY Brij Chandrarav0
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If your response is limitless. you find new life in every passing moment. This is the nature of life..!
SADGURU.जीवन की प्रकृति को समझना मतलब प्रकृति के वैविध्य को समझना। प्रकृति के सानिध्य का आह्लाद अनुभूत करना। जीवन के कईं बहतरीन पहलूओं पर 'जग्गी वासुदेव' यानी 'सद्गुरु' का मत बहुत ही सटीक लगता हैं। वैयक्तिक रुप से मुझे भी जीवन के बारें में लिखना, पढ़ना और सोचना अच्छा लगता हैं। मुझे समझ में आ रहा हैं, जीवन कोई सामान्य घटना नहीं हैं। जीवन कोई समय का फासला भी नहीं हैं। जीवन कोई अकस्मात नहीं हैं। जीवन ऊर्जा से भरा और असीमित शक्तिओं से भरी समयावधि हैं।
आइए, सद्गुरु के बहतरीन शब्द पढ़े और जीवन की जागरुकता भरी सोच को महसूस करें।
"जिस भी चीज को आप पूरी तरह रिस्पॉन्स देते हैं वो आपकी हो जाती हैं। अगर आप पूरे ब्रह्मांड को सचेतन रिस्पॉन्स दें तो पूरा ब्रह्मांड आपका हो जाता हैं। पतझड़ के समय में जैसा कि आप देख सकते हैं। जो पत्ता पेड़ का था, या शायद पेड़ को ऐसा लगता था। वो नीचे गिर जाता हैं। धरती माँ सबको अपना लेती हैं, पूरी तरह से अपना लेती हैं। इसी वजह से वो इन मरे हुए पत्तों से भी नया जीवन पैदा कर देती हैं। जीवन की प्रकृति ऐसी ही है की अगर आपका रिस्पॉन्स असीम हैं तो हर चीज से आप एक नया जीवन बन जाते हैं। उम्र समय आप पर राज नहीं करते हैं। आप 'समयाधिपते' बन जाते हैं। आप समय से ऊपर होते हैं। या आप समय के चक्र पर सवार होना सीख जाते हैं क्योंकि आपका रिस्पॉन्स असीम हैं। सिर्फ अपने शरीर तक सीमित रहने से आप समय के गुलाम बन जाते हैं। समय आपको कुचल देगा। लेकिन अगर आपका रिस्पॉन्स असीम हैं तो बीतने वाले हर पल से आप नया जीवन पाते हैं। यही जीवन की प्रकृति हैं।"
रिस्पॉन्स देना यानी प्रतिक्रिया देना। हमारे बाहरी वातावरण में जो कुछ हो रहा है, उसके प्रति जागरुकता से बर्ताव करना हैं। उससे हमारी भीतरी संवेदनाओं को जाग्रत करना हैं। उसके तालमेल में रहना मतलब जीवन को करिब से समजने का प्रयास करना..! मनुष्य के रुप में मन-बुद्धि के उपयोग से कैसे जीना है ? उसका जवाब हमें खुद ही खुद से लेना होगा। जवाब मिल जाय, तब सारे संसार को देखने का हमारा नज़रिया ही बदल जाएगा। 'प्रकृति और ब्रह्मांड' को सचेतन रुप से महसूस करना संभव हो जाएगा। जीवन की शानदार पहचान होती चली जाएगी। हमारी 'उम्र और समय' का संबंध समझ में आता जाएगा।
फिर शुरु होगी एक यात्रा..! आनंद से भरी जीवन यात्रा..! पंछीओं के गीत से भरी और हवाओं की सुगंधित सरसराहट से भरी...! नदियों के कलकल करते संगीत से भरी, पर्वतों और मैदानों की हरियाली से भरी जीवनयात्रा..!
कईं लोगों के बीच जाना होता है, तब सबको पसंद पड़नेवाली जीवनयात्रा। सुंदर काम के लिए हरदम निमित्त बनती हुईं यात्रा..! ये ब्रह्मांड की ही असीम कृपादृष्टि कहलाएगी। ब्रह्मांड को धारण किए हुए आसमान से बातें करने का मन हो तो समझ लेना मेरे जीवन में कुछ चमत्कार घटेंगे, कोई सुनहरे काम के लिए या संसार में घट रही अच्छी घटनाओं के निर्माण के लिए मेरा प्रयोग होगा। मैं जीवन को एक वस्तुत: समझता जा रहा हूं। मैं इस ब्रह्मांड का एक छोटा-सा उपकरण हूँ। मुझे बस बहते जाना हैं। मुझे अदृश्य शक्तिओं की मर्ज़ी के अनुसार एक पत्ते की तरह गिरने का आनंद भी लेना हैं। एक छोटे-से बीज की तरह टूटकर अंकुरित होने के आनंद में जीना हैं। एक परिन्दे सी मुस्कान लेते हुए गाते ही रहना हैं। कोई मुझे क्या परेशान करेगा !? मैं इस ब्रह्मांड का अभिन्न अंग हूं..! वृक्ष की हरियाली को चूमता हुआ और हवा की ठंडी लहरों के साथ गीत गाता हुआ..! एक छोटा-सा जीव हूँ...मुझे बस बहना हैं..!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
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