March 03, 2026
BY Brij Chandrarav0
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If you refuse to lose your inner Happiness no outer loss can truly Defeat you..!
Brahma kumaris."यदि आप अपनी आंतरिक खुशी को खोने से इनकार करते हैं, तो कोई भी बाहरी नुकसान आपको हरा नहीं सकता।"
भारत एक आध्यात्मिक राष्ट्र हैं। आत्मचेतना संबंधित कईं पहलूओ पर यहां काम होता हैं। काम शब्द ठीक नहीं लगता हैं। इसलिए सत्वशील शब्द से बात रखता हूं। योग-तप-ध्यान-साधना-समाधि जैसे कईं जीवन को बेहतर मार्ग पर ले जानेवाली गतिविधियों पर कार्य होता रहा हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ Brahma Kumaris एक अंतरराष्ट्रीय महिला-नेतृत्व वाला आध्यात्मिक संगठन है। जो 'राजयोग ध्यान' के माध्यम से आत्मचेतना, आंतरिक शांति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट कार्य करती है। १९३० के दशक में स्थापित हुई यह संस्था सभी मनुष्यों को एक समान मानती है। और स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन का महान लक्ष्य रखती है। इसका मुख्यालय माउण्ट आबू राजस्थान में है।
ब्रह्माकुमारीज विचार वैयक्तिक जीवन को शांति प्रदान करने का कार्य करती हैं। उनकी सादगी-मौन मुझे बहुत ही पसंद हैं। उनके आध्यात्मिक विचारों में से आंतरिक खुशी शब्द मिला हैं। खुशी हमारे भीतर हैं, उसे बरकरार रखना हमारे ही हाथ में हैं। उसे हमें खोना नहीं हैं; हम खुद उससे झुडे रहेंगे तो दुनिया की कोई ताक़त उसे मिटा नहीं पाएगी। भीतर की खुशी, हमारी शांति पर बाहरी स्थिति कोई नुकशान नहीं कर सकता ऐसा दृढ़-विश्वास रखना चाहिए। इससे हमारे जीवन को फायदा होगा। आज के समय में मनुष्य जीवन में आनंद Happiness को महसूस करना सबसे बड़ी चुनौती जैसा हैं।
क्यों सबसे बड़ी चुनौती है ?
क्योंकि हम जिस समय में रहते हैं, इस समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ी हैं। वैसे प्रतिस्पर्धा तो ठीक है लेकिन किसी दूसरे को परेशान करके खुद आगे बढ़ने की चेष्टा ख़तरनाक हैं। अक्सर इसके परिणाम विचित्र होते हैं। दूसरों की गति को रोककर क्षणिक आनंद मिल सके ऐसा संभव हैं। उस आनंद को लोग सफलता मानते हैं, बुद्धि चातुर्य मानते हैं। अपनी जीत बताते हैं। ऐसी षड़यंत्रकारी वृत्ति से मिला लाभ कायम नहीं टिकता। इसके बारें में भी सोचना अच्छा हैं। किसीको जातिवाद, प्रांतवाद या संप्रदायवाद की संकुचितता से हल्का समझना वैयक्तिक दुर्बलता से कम नहीं हैं। एक राष्ट्र की एक धर्म की कल्पना ऐसे टूटती हैं। वैयक्तिक स्वार्थ और अपनी ही बात को स्थापित करने के मत से किसको नुकसान होगा इसके बारें में हमें ही सोचना होगा।
इन स्थितियों में एक व्यक्ति साम्यता को प्रेम-आदर की भावना को पालता हैं। उसे भयंकर विचित्रओं के सामने कैसै संभलने हैं इसका यह मंत्र हैं..."No outer loss can truly Defeat you..! कोई भी बाहरी नुकसान आपको हरा नहीं सकता।" खुद संभलने का यह अद्भुत संदेश हैं। युद्ध किये भी जाते हैं और टाले भी जाते हैं। विध्वंश के सामने संवर्धन भी हैं। हमारा वैयक्तिक और सामूहिक चयन किस मार्ग के लिए हैं !? इसके बारे में सोचना तो बनता हैं। सोच होगी तो अच्छे मार्ग का चयन भी होगा। मनुष्य जीवन को बेहतर मार्गर दिखाने वाले ब्रह्माकुमारीज जैसी विचारधारा को वंदन करता हूं।
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
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