"Ascension means it's You vs You.
And one of you has to die"A keredoldscuid.
"आरोहण का अर्थ है तुम बनाम तुम। और तुममें से एक को मरना होगा।" ए. केरेडोल्डस्कुइड
'Ascension' means the action of rising to an important position or a higher level.
'आरोहण' का अर्थ है किसी महत्वपूर्ण पद या उच्च स्तर पर पहुंचना।
उठना चाहते हो !?
कुछ करना चाहते हो !?
या फिर उड़ना चाहते हो..!? जीवन में बेहतरीन एक्शन चाहते हो तो ये ब्लोग आपके लिए ही हैं। सृष्टि के सब मनुष्य को जन्म से जीवन मिलता है। रात-दिन के घटनाक्रम में जीवन बहता चला जाएगा- बढ़ता ही रहेगा। इसमें कुछ अलग करना हैं, ये जीवन के लिए चैलेंज हैं। इसके लिए ईश्वर की कुछ अदृश्य अपेक्षाओं को समझकर आगे बढ़ना एक अच्छा स्टेप-कदम माना जाएगा। हरेक व्यक्ति की स्थिति-परिस्थिति या फिर योग- संयोग अलग हो सकते हैं। फिर भी कुछ नये मार्ग को चयनित करके अपना मुकाम तय करना हैं। इस मार्ग पर चलने की कोशिश जीवन की सबसे सुंदर क्रिया होगी ऐसा मुझे प्रतित हो रहा हैं।
'एसेंशियल' एक मानक अंग्रेजी शब्द नहीं है, लेकिन यह संभवतः 'एसेंट' शब्द जिसका मतलब ऊपर की ओर बढ़ना ऐसा होता हैं। एक ओर अर्थ में 'एसेंशियल' 'आवश्यकता या जरूरत' को दर्शाता है। अब मैं बात करता हूँ आवश्यकता की, जरुरत की और उपर उठने के साथ किसी उच्चतम अवस्था तक पहुंचने की..! शरीर रूप साधन के उपयोग से हमें जीवन को गति देनी हैं। शारीरिक अवस्था प्रकृति के आधिन हैं मगर हमारी मानसिक-सांवेगिक़ और आध्यात्मिक गति; जिसके कारण हम हमारी पहचान बना सकते हैं। दूसरों से अलग करके संसार में नये मुकाम स्थापित कर सकते हैं। उसके लिए जितना हो सके इतना अच्छा समझ लेना होगा। हमारी मानवीय गति को बढ़ानेवाली संभावनाओं से ब्रह्मांड भरा हुआ हैं। फिर भी समस्याएं आती हैं। क्यों ऐसा विपरीत मंजर खड़ा होता हैं ? इस चर्चा में स्वाभाविक रुप से कुछ प्रश्न जरुर खडे होंगे।
संभावनाओं के बीच विकलता क्यों आती है ?
कौन हमें रोक रहा है ?
हमें किसका सामना करना होगा ?
उत्तर ब्लोग के टाईटल में ही हैं। हम खुद अपने सामने हैं। 'मैं के विरुद्ध मैं..!' की प्रतिस्पर्धा हैं..! you vs you..! जीवन का ये महत्वपूर्ण पहलू हैं। हमें इसे समझना होगा। मैं खुद अपने को रोक रहा हूँ। इसलिए संभावनाएं मुझे दिखाई नहीं पड़ती। इसी कारण मदद करने वाली शक्तियां विमुख हो जाती हैं। और हम धीरे धीरे ठहराव के पाश में बंधने लगते हैं। 'एक्शन ऑफ राइजिंग' नहीं हो पाता..! 'जीवन ऐसे ही बहता है, मन में प्राप्ति की ओर खुद बढ़ना होगा..!' ऐसी भावनाएं जरुर कारगर साबित हो सकती हैं। ठहराव से भरा एवं भटकाव से भरा जीवन उम्र की ओर बढ़ता हैं, वैसे ही संवेदनात्मक बनता जाता हैं, मन सहज ही मजबूत बनता जाता हैं। एक सुंदर पथ हमारे सामने दृश्यमान होता हैं।
हम गिर जाएं या गिरा दिए जाएं
खुद से हमें ही उठना है..!
धूल झाड़ कर हिम्मत से फिर,
आगे और सिर्फ आगे ही बढ़ना है...! (श्रेयांसी सतीश)
एक विचार को अनुमोदन मिले तो वो विचार थोड़ा दमदार बन जाता हैं। देखिए, ए. केरेडोल्डस्कुइड ने मुझे एक विचार दिया। उस पर मैं ब्लोग कर रहा था। श्रेयांसी सतीश जैसी कवियित्रीने उसको अनुमोदन दे दिया। तेरे किरदार को सुवासित करना तेरे ही हाथ में हैं। एक को मरना होगा मतलब अपनी इच्छाओं-आकांक्षाओं को छोडना होगा। कुछ पाने के लिए अपनी पसंद को छोडकर एक का स्वीकार करना होगा। बहुत ही सुंदर विचार पर चिंतन करते हुए मैं भी खुश हो गय़ा। जीवन को एक 'विचारतजुर्बा' मिला हैं। अब अपने काम में लगना हैं। बेहतरीन रास्ते पर अकेले ही चल पड़ना हैं। आरजू की परवाह किए बिना, बस हमें चलते जाना हैं। इसे हम 'एक्शन ऑफ राइजिंग' कहेंगे। संसार में खुद पर विजय पाकर ही दमदार किरदार खड़े हुए हैं। आरोहण के मार्ग पर थमना मना हैं, क्योंकि निर्धारण में बाधा आ सकती हैं !? और आरोहण कठिनाईओं के सामने किए गए मजबूत इरादों की कोशिश हैं..!?
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli
Gujarat.
INDIA
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Dr.brij59@gmail.com
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7016171996

આરોહણ જીવન જીવવા માટેની નિસરણી...
ReplyDeleteGood morning 🌞
ReplyDelete,,,, इसलिए कि एक विचार एक किरण की तरह है और यह विचार एक नई सुबह को लेकर आया है,,,,,,,,,
मैं जीस विचार धारा से तादात्म्य रखता हुं,यह
पुरी मानव सभ्यता को एक नई सोंच नई उर्जा और नई सुबह देने में सक्षम है,,,,
मैं बिन मै मरे नही, मैं सो मारना मैं।
किन विध मैं को मारिए,या विध हुई इनसे।।
यह जो संसार हैं यहां मनुष्य है जीव सृष्टि है यह ऐसे ही नही है कोई विशेष लक्ष्य हेतु निर्मित हुए हैं,जन्मे हैं।
तो,,,,यह ज्ञात हो आवश्यक है,,,,,
जन्म संयोग भी है और सर्जन भी, प्रकृति अपनी जिम्मेदारी बखुबी निभा रही हैं,कुछ दोष मानव सभ्यता के हैं जो सुधारना अनिवार्य हैं,अगर ऐसा नही होता है तो जो सर्जन हार की भुमिका है हेतु है ईसमे वक्त अधिक लगेगा,,,,,
यहां,,
पहले पी तु सरबत मौत का,कर तेहकिक मुकरर।
एक जीन जरा सक रखे,पीछे रहो जीवत या मर।।
मनुष्य अपने तरीके से भी मृत्यु को प्राप्त नही सकता हैं यह एक मर्यादा हैं और हमें ईस मर्यादा से उपर उठना है,, कैसे?
मृत्यु शरीर की होती ही नहीं है यह तो एक प्रक्रिया हैं प्रकृति से निर्मित प्रकृति में लय को प्राप्त हो जाती है तो बचता कौन है?
तो,,,एक ओर प्रश्न मृत्यु किसकी और कैसे?
हमारे भीतर जो सुक्ष्म रुप से चित् वृत्तियों में जो मैखुदी घर कर बैठी है ईसे मारना ही मोत हैं,और यह हमारे हाथ में है,,
ए जो सुन्या सीख्या पढ्या,कह्या विचारधारा विवेक।
इसमें सारी उपलब्धियां आखिर में नष्ट हो जाती है,,
अगर जो तुने ईश्क को प्राप्त नही किया है तो,,
इसलिए,,,,
आओ मैं मारे की लार।
अर्थात अपनी मैं को जीते जी मार दो,,
एही मैं खुदी टले,बाकी रह्या खुदा।
हजारों जन्मों के साथ यह मैं हमारी मैं के साथ चली आ रही है,,
सत्ता विस्तार, संपत्ति विस्तार प्रसिद्धि विस्तार
ईसीमे जीवन की मैं को जीने का अवसर ही नहीं मिल पाता है,,
सिकंदर हो या आलमगीर अगर पुरी पृथ्वी में साम्राज्य स्थापित कर लेता है तब भी तो ठीक लेकिन अगर यह पुरे चौदह लोक पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लेता तब भी यह मैं हैं कि मरती ही नहीं है,,
,, जैसे कबीर जी ने कहा है,,
ढाई अखर प्रेम का पढे सो पंडित होय।
आजकल सत्ता विस्तार और विकास के साथ ज्ञान की मैं जीवन के आनंद को ब्लेक होल की तरह निगल रही है,यह जानते हुए भी कि पृथ्वी से लाखो गुना बडे सुरज को भी ब्लेक होल निगल जाएगा,,,
ना ईश्वर ना मुल प्रकृति ता दिन की कहु आपाबिती,,,
डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लीखा है,,,
तब भी कुछ तो था और महा प्रलय के बाद भी यह कुछ तो रहेगा ही,,
यह जो सत्य है आनंद है यही मैं हैं ईसे पाने के लिए हमारी उस मैं को मारना ही होगा।
,,अब हमें यह समझना हैं कि
मेरे भीतर कौन सी मैं को बचाने की आवश्यकता है,
मेरे न कछू बंदगी,न करी करनी।
ओ मैं मुझमें न रही,ए तो मैं हके करी अपनी।।
बीग बैग की तरह नही यह ब्रह्मांड बडी ही युक्ति से निर्मित हुआ है,,अगर ऐसा नही होता तो ईसमे कमियां होती,,, कमियां मुझमें हैं ईसे ही जैसे
हमें पापी को नही पाप को ही हरना है,,,
रावण के भीतर जन्मी रावण की वृत्ति ओ को मारने में ही भलाई हैं,,,
सुख शीतल करु संसार।
सत्यं ज्ञानम् अनंतम् ब्रह्म।
एक विचार मैं के साथ जन्मा और मरा मैं के साथ ही,,,,
धन्यवाद विचार किरण को मकर संक्रांति के भौगोलिक और विज्ञान मय दिन के साथ प्रगट करने के लिए,,
जागे अपनी मैं के साथ,
और मारे उस मैं को जो जन्मी हैं हमें जगाने हेतु,,,,,,
आभार मित्र, आपका नाम लिखे तो अच्छा रहेगा।
Deleteबहुत ही बेहतरीन ब्लॉग हमे खुद अपनेआप से सही क्या है ये समझकर चुनना है जीना है you vs you
ReplyDeleteLife oriented simple magic