March 2026 - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Thursday, March 12, 2026

Our thought process..!!
March 12, 2026 2 Comments

This is the nature of your Mind. if you try to avoid certain thoughts, only those will occur.

SADGURU.

आपके मन का स्वभाव यही है; यदि आप कुछ विचारों से बचने की कोशिश करेंगे, तो केवल वही विचार उत्पन्न होंगे।


मन के स्वभाव को समझना मुश्किल हैं। मन को चंचल कहा गया हैं। मन की दौड को पकड़ना कठिन हैं। मन की गति को आज तक नापना संभव नहीं हुआ हैं। मन अदृश्य होकर भी हमें बांधकर रखता हैं। मन की तरंगे उठती हैं, शांत होती हैं। इन तरंगो के ईशारे हम नचाते हैं। हम चाहकर भी कोई विचार को बंद नहीं कर सकते, मतलब हमारे दिमाग को हम ऐसा कोई आर्डर भी नहीं दे सकते। विचार की मूल ही अवधारणा बहना हैं। इसी लिए सद्गुरु के उन वचन को एकबार ओर पढ़िए। "आपके मन का स्वभाव यही है; यदि आप कुछ विचारों से बचने की कोशिश करेंगे, तो केवल वही विचार उत्पन्न होंगे।" मतलब विचारों से बचना नामुमकिन हैं। उसे बहने देना ही ठीक हैं।

अब एक दो प्रश्न उठते हैं।
विचारों की इस अस्खलित धाराओं में केवल बहना हैं ?
या फिर,
विचारों को रोकने का प्रयास करना हैं ?

चलों कुछ ऐसा सोचते हैं जिसे कुछ हल मिले ऐसा फिटिंग्स आए। विचारों को रोकने का प्रयास करना व्यर्थ हैं, उसे रोकना नहीं है केवल दिशा बदलनी हैं। जो विचार मन में उद्घटित होते हैं, उसमें से जीवन खोजना हैं। अपने लिए जरुरी है, हमारे जीवन में आनंद भरने वाले, हमारे आनेवाले समय को बेहतर बनाने वाले विचारों को छूटे दौर से प्रगट होने देना हैं। कोई हरक़त के बिना उसका स्वागत करते रहना हैं। एक बात समझ लेनी चाहिए। कि विचार हमारे अनुभवो की पड़छाई हैं। जीवन में जो कुछ घटित होता है, वो बार बार विचार का रुप धरकर हमारे सामने आते हैं। कल्पना के जरिए वो हमारे वर्तमान को प्रभावित करते हैं। कभी-कभार हम इस विचार की आँधी में फंस भी जाते हैं। इसने कईं प्रकार के रोगो का स्थान भी ले लिया हैं।


विचार एक प्रवाह हैं, हमें इस प्रवाह का आनंद लेना हैं। विचार तो जीवन का आधार हैं। हम इस आधार से डरे या दूरी बनाएं ये कैसे संभव होगा। सुंदर विचार के लिए मन की शुद्धि आवश्यक हैं। मन में किसी के लिए भी कटुता पैदा हुई तो समझो जीवन बेकार हो जाएगा। मन में इस कटुता के कारण वैमनस्य या असूया बढ़ेगी। और इसको झेलना तो खुद ही पड़ेगा, कोई बचानेवाला नहीं हैं। 'विचारआनंद' के लिए हमारे पास ध्यान विधि है, धर्माचार हैं साथ ही आध्यात्मिक गति हैं। ये तीन हमारी मूलभूत सम्पदाएं हैं। इससे ही मनुष्य जीवन में वैचारिक आनंद की प्राप्ति हो सकती हैं। विचार प्रवाह को 'आनंदगति' एवं 'योग्यदिशा' मिल सकती हैं।

सांप्रत समय में सब समस्याओ का समाधान मिल सकता हैं। आज मनुष्य भौतिक वआर्थिक रूप से संपन्न होता जा रहा हैं। फिर भी मनुष्य वैचारिक दुर्बलता में फंसे जा रहे हैं। इसका कारण धर्म अस्पष्ट होता जा रहा हैं। ध्यान की क्रियाएं मनोरंजन से भरी होती जा रही हैं। आध्यात्म केवल दिखावे का साधन बनता जा रहा हैं। आज ज्ञान-विज्ञान के युग में, स्पष्टता के युग में भी मनुष्य बेबस होता जा रहा हैं।

इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं ?
सत्य क्यों प्रताडित हो रहा हैं ?
भारत वर्ष की वैचारिक धरोहर क्यो डगमगा रही हैं ?

वैयक्तिक स्वार्थ, ज्ञाति-जाति-धर्म-संप्रदाय आधारित संगठनात्मक स्वार्थ वैचारिक दूषण फैलाता हैं। इससे किसीको फ़ायदा होनेवाला नहीं हैं फिर भी चल रहा है। आज समृद्ध विश्व में समस्याएँ बढ़ रही हैं इसका कारण वैचारिक दुर्बलता हैं। खैर, मनुष्य के रूप में अच्छे बुरे वर्ताव का फर्क समझमें आना, अच्छाई को सीखना खुद के लिए जरुरी हैं।

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.world
Dr.brij59@gmail.com
+ 919428312234


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Tuesday, March 3, 2026

NO OUTER Defeat you..!
March 03, 20260 Comments

If you refuse to lose your inner Happiness no outer loss can truly Defeat you..!

Brahma kumaris.

"यदि आप अपनी आंतरिक खुशी को खोने से इनकार करते हैं, तो कोई भी बाहरी नुकसान आपको हरा नहीं सकता।"


भारत एक आध्यात्मिक राष्ट्र हैं। आत्मचेतना संबंधित कईं पहलूओ पर यहां काम होता हैं। काम शब्द ठीक नहीं लगता हैं। इसलिए सत्वशील शब्द से बात रखता हूं। योग-तप-ध्यान-साधना-समाधि जैसे कईं जीवन को बेहतर मार्ग पर ले जानेवाली गतिविधियों पर कार्य होता रहा हैं।

ब्रह्माकुमारीज़ Brahma Kumaris एक अंतरराष्ट्रीय महिला-नेतृत्व वाला आध्यात्मिक संगठन है। जो 'राजयोग ध्यान' के माध्यम से आत्मचेतना, आंतरिक शांति और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट कार्य करती है। १९३० के दशक में स्थापित हुई यह संस्था सभी मनुष्यों को एक समान मानती है। और स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन का महान लक्ष्य रखती है। इसका मुख्यालय माउण्ट आबू राजस्थान में है।


ब्रह्माकुमारीज विचार वैयक्तिक जीवन को शांति प्रदान करने का कार्य करती हैं। उनकी सादगी-मौन मुझे बहुत ही पसंद हैं। उनके आध्यात्मिक विचारों में से आंतरिक खुशी शब्द मिला हैं। खुशी हमारे भीतर हैं, उसे बरकरार रखना हमारे ही हाथ में हैं। उसे हमें खोना नहीं हैं; हम खुद उससे झुडे रहेंगे तो दुनिया की कोई ताक़त उसे मिटा नहीं पाएगी। भीतर की खुशी, हमारी शांति पर बाहरी स्थिति कोई नुकशान नहीं कर सकता ऐसा दृढ़-विश्वास रखना चाहिए।  इससे हमारे जीवन को फायदा होगा। आज के समय में मनुष्य जीवन में आनंद Happiness को महसूस करना सबसे बड़ी चुनौती जैसा हैं।

क्यों सबसे बड़ी चुनौती है ?
क्योंकि हम जिस समय में रहते हैं, इस समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ी हैं। वैसे प्रतिस्पर्धा तो ठीक है लेकिन किसी दूसरे को परेशान करके खुद आगे बढ़ने की चेष्टा ख़तरनाक हैं। अक्सर इसके परिणाम विचित्र होते हैं। दूसरों की गति को रोककर क्षणिक आनंद मिल सके ऐसा संभव हैं। उस आनंद को लोग सफलता मानते हैं, बुद्धि चातुर्य मानते हैं। अपनी जीत बताते हैं। ऐसी षड़यंत्रकारी वृत्ति से मिला लाभ कायम नहीं टिकता। इसके बारें में भी सोचना अच्छा हैं। किसीको जातिवाद, प्रांतवाद या संप्रदायवाद की संकुचितता से हल्का समझना वैयक्तिक दुर्बलता से कम नहीं हैं। एक राष्ट्र की एक धर्म की कल्पना ऐसे टूटती हैं। वैयक्तिक स्वार्थ और अपनी ही बात को स्थापित करने के मत से किसको नुकसान होगा इसके बारें में हमें ही सोचना होगा।

इन स्थितियों में एक व्यक्ति साम्यता को प्रेम-आदर की भावना को पालता हैं। उसे भयंकर विचित्रओं के सामने कैसै संभलने हैं इसका यह मंत्र हैं..."No outer loss can truly Defeat you..! कोई भी बाहरी नुकसान आपको हरा नहीं सकता।" खुद संभलने का यह अद्भुत संदेश हैं। युद्ध किये भी जाते हैं और टाले भी जाते हैं। विध्वंश के सामने संवर्धन भी हैं। हमारा वैयक्तिक और सामूहिक चयन किस मार्ग के लिए हैं !? इसके बारे में सोचना तो बनता हैं। सोच होगी तो अच्छे मार्ग का चयन भी होगा। मनुष्य जीवन को बेहतर मार्गर दिखाने वाले ब्रह्माकुमारीज जैसी विचारधारा को वंदन करता हूं।

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat,.
INDIA
drbrijeshkumar.world
Dr.brij59@gmail.com
+91 9428312234

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Practice Critical thinking..!

  Analyze every situations, problems and informations  from different angles. you will always get a different  perspective. आलोचनात्मक सोच क...

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