July 2026 - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Thursday, July 30, 2026

A beautiful light waiting for you..!
July 30, 2026 3 Comments

 BE BRAVE

when your path is dark. Believe you are healing with cvery step because there's a beautiful light waiting for you.
Roger Lee

मैं विचार और उस विचार के स्रोत से अक्सर अभिभूत होता रहा हूं। वैसे चरित्र के बारे में जानना, पढ़ना और उनके संघर्ष को महसूस करना अच्छा लगता हैं। एक विचार पढकर पसंद आता हैं फिर मैं यह विचार किसने लिखा हैं ? इसके बारें में छानबीन शुरु करता हूं। मुझे उस मशक्कत से भी आनंद मिलता हैं। वो मेरा आनंद आप सब में बांटता रहता हूं। इसे मैं मेरा 'आनन्दविश्व' कहता हूँ।


रोजर लुन यु.एन ली (कार्यकाल 19 फरवरी 1920 से 23 जून 1981) वो एक अमेरिकी 'मॉडर्निस्ट आर्किटेक्ट' थे। जिन्होंने उत्तरी कैलिफ़ोर्निया, नेवादा और हवाई में 100 से ज़्यादा मकान और दूसरे प्रोजेक्ट्स को डिज़ाइन किया था। उनका ज़्यादातर काम 1960 के दशक में हुआ था। और मुख्य रूप से सान फ़्रांसिस्को के एरिया में हुआ था। उन्हें एक ऐसे आर्किटेक्ट के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने मीडिल क्लास के लिए शानदार स्टाइल वाले घर डिज़ाइन किए थे। आज उन्हें 'सदी के बीच के दौर के भुला दिए गए मॉडर्निस्ट आर्किटेक्ट्स' में से एक माना जाता है।1947 में जब ली को पहली बार लाइसेंस मिला, तब वे देश के कुछ गिने-चुने चीनी-अमेरिकी आर्किटेक्ट्स में से एक थे। अपने अनोखे 'मॉडर्निस्ट डिज़ाइन' के तरीकों की वजह से उन्हें अपने समय के सबसे बुद्धिमान आर्किटेक्ट्स में से एक माना जाने लगा था। (स्रोत विकीपीडिया)

"हिम्मत रखो, जब तुम्हारा रास्ता अंधेरे से भरा होता हैं, तो विश्वास रखो कि हर कदम के साथ तुम ठीक हो रहे हो। क्योंकि एक खूबसूरत रोशनी तुम्हारा इंतज़ार कर रही होती है।"

मैंने रोजर ली के इन शब्दों में अद्भुत उर्जा महसूस की है। अंधेरा कायम नहीं रहेगा। पीडाओं का भी अंत होता हैं। शर्त इतनी हैं; विश्वास रखना हैं। कदम-कदम पर आस्था बनाए रखनी हैं। एक अद्भुत आशावाद के इन शब्द को फिर एक बार पढ़े; "एक खूबसूरत रोशनी तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं..!" हमें केवल इनमें श्रद्धेय बने रहेना हैं।

हम सबने अपने-अपने जीवन में छोटी-मोटी कठिनाईयां देखी होगी, झेली भी होगी। उनमें से गुजरने का दर्द सबने कहीं न कहीं सहा होगा। कईं बार टूटना हुआ होगा, शायद भीड़ में भी अकेलापन सहा होगा। बारबार बिना कारण आंखे नम सी हुई होगी। पीड़ा सहने की गुलजार की एक गज़ल पढ़ें, सूकून मिलेगा। फिर रोशनी की ओर बढ़ते हैं।

शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है।
दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है।
कौन पथरा गया है आँखों में, बर्फ़ पलकों पे क्यूँ जमी सी है।
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, आदत इस की भी आदमी सी है।
आइए रास्ते अलग कर लें, ये ज़रूरत भी बाहमी सी है।

ऐसी तड़प में से भी एक रास्ता निकलकर सामने आया होगा। सामने मंजिलों के कारवे उमड़-घूमडकर आया होगे। काफ़ी दिनों से जिस मंज़र का इन्तज़ार था वो आंखो के सामने उठ खड़ा हुआ होगा। जैसे खुबसूरत रोशनी से भरा मंज़र..! आनंद से भरे वो लम्हें..! सलाम गुलजार साहब !

इस विषय को आगे बढ़ाते ओशो का स्मरण हुआ। ओशो रजनीश कहते है : "तुमने देखा है नदी को वो पत्थरो से टकराती हैं, वो गिरती है, वो घूमती है। वो रास्ता बदलती है लेकिन वो गबराती नहीं, क्योंकि नदी को पता हैं समंदर तय हैं। तुम्हें सिर्फ एक बात नहीं पता 'हमारा समंदर भी तय हैं..!' एक मुकाम तय हैं। तुम्हें लगता हैं तुम्हारी हार अंत हैं, पर मैं कहता हूं हार तैयारी हैं। तुम्हें लगता है टूटना बर्बादी है पर मैं कहता हूं टूटना जन्म हैं मैं तुम्हें एक तीखा सच बताता दूं...जीवन उन्हीं के साथ कठोर होता है जिन्हें वो भीतर से मजबूत बनाना चाहता हैं। कमज़ोरो को जीवन सहलाता हैं और मजबूत लोगो को जीवन तपाता हैं। तपाने का मतलब सजा नहीं तपाने का मतलब शुद्ध करना हैं !" ओशो की इस बात से ज्य़ादा अंधेरे के सामने खड़ा रहने की बात कोई नहीं कर सकता। ओशो की स्पष्टता भरी बातो की यही ताक़त हैं।

कभी कभार खाली हो जाना भी जरुरी हैं। हमारे खाली हाथ प्रार्थना बन सकते हैं। आज नहीं तो कल वो उजियारा बनके हमारे सामने जरुर  आकारित होते रहेंगे। आज 'आनंदविश्व सहेलगाह' के वैचारिक ब्लोग में बस इतना ही..!

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
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Wednesday, July 8, 2026

A wonderful step : sowing the seeds of beauty.
July 08, 2026 3 Comments

सुंदरता के बीज..!!

Kindness, compassion, hope, love, peace are seeds of beauty.


जीवन जटिल है, फिर भी सुंदर हैं। एकबार जीवन की गहराईयों से कैसे निपटना हैं यह समझ में आ गया तो फिर आनंद ही आनंद हैं। आज ऐेसे एक कदम की बात करता हूं।

sowing the seeds of beauty. सुंदरता के बीज बोना..!
एक वाक्य जो आप बारबार पढ़ना चाहेंगे।
"Whenever you are creating beauty around you. you are restoring your soul..!"
"जब भी आप अपने आस-पास सुंदरता रचते हैं, तो आप अपनी आत्मा को फिर से जीवंत कर रहे होते हैं।"


'Healing hearts' एक फेसबुक पेज़ हैं। वहां से दिल को छू लेने वाले काफ़ी सेन्टेन्स मिलते रहते हैं। यहां दिया गया वाक्य मुझे अच्छा लगा। इसकी गहराई तक डूबकी लगाते हैं। 'ब्यूटी ओफ लाईफ' 'जीवन की सुंदरता' से बढ़कर इस संसार में बड़ी बात हो ही नहीं सकती। ईश्वर ने हमें जीवन दिया हैं, मन-बुद्धि दी हैं। हम अच्छा-बूरा सोचने के लिए और उसे एक्शन में प्रक्रिया में लाने के लिए सक्षम हैं। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए हम जीवन के आनंद को खोजते हैं। सही में हमारा जीवन उद्देश्य भी यही हैं। लेकिन जीवन में कईं तरह के भटकाव और ठहराव का सामना करना पड़ता है। इससे जीवन मैं थोड़ी बहुत दिक्कते बढ़ती हैं। मन अस्थिर हो जाता हैं। जीवन का आनंद कहीं पर खो जाता हैं। हम मनुष्य के रुप में कईबार बेबस बन जाते हैं। भौतिकवाद में सुख हैं, समाजवाद में सुख हैं, कोई संगठनात्मक पहलूओ में सुख हैं, कईं आध्यात्मिक गतिविधियाँ चल रही हैं। फिर भी सत्य कहां है ? जीवन में आनंद कहां हैं..!?

सोचने की बात है ना ? हमें अपनी वैयक्तिक शुद्धि के लिए और हमारे भीतरी उत्कर्ष के लिए आसपास की स्थिति का सुधार करना चाहिए। सबको पता है कि इस धरती पर चारों ओर सुंदरता ही सुंदरता हैं। लेकिन हमारे पास उसे देखने का समय नहीं हैं। हम कहीं पर ज्यादा उलझे हैं। कईं प्रकार के काम और हमें क्या मिलेगा !? इसके बीच हम फंसे हुए हैं। शायद बचपन से हमने यही देखा है, या फिर हमें यही सिखाया गया हैं। इसके कारण मनुष्य की जन्मजात शक्तियाँ हम भूल रहे हैं। इस संसार में हमारा जन्म किसी उद्देश्य के कारण हुआ हैं। ईश्वर का कोई भी सृजन अकारण नहीं होता। संसार में हरेक छोटा-सा जीव भी महत्वपूर्ण हैं। फिर हमारी महत्ता कितनी होगी !? मनुष्य को जन्म से मिले शरीर या जीवन का मूल काम आनंद हैं। हरेक मनुष्य की आत्मा अच्छे कार्यो से खुश होती हैं। लगभग ऐसा अनुभव सबका हैं। फिर भी दूसरों की खिंचाई करना, दूसरों की अदेखाई और 'मैं ही श्रेष्ठ हूं' की लडाई लड़ रहे हैं। वैसे तो ये लड़ाई खुद से ही हैं। इसकी समझ काफ़ी देर के बाद आती हैं। जब आसपास काफ़ी-कुछ प्रमाण में गंदगी का ढेर लग चुका होता हैं। तब हम आनंद ढूंढ रहे होते हैं। कैसे मिलेगा आनंद..!?!

हम मनुष्य सबसे सुंदर हैं। पृथ्वी के सारे जीवों में उत्कृष्ट हैं। ईश्वर की सबसे अच्छी, बेनमून कृति हम ही तो हैं। इसी कारण सुंदरता को भूलना हमारी ही मूर्खता हैं। हमारा 'मूलभूत भाव' सुंदरता को बिखेरना ही तो हैं। इससे हमारा मन शुद्ध रहेगा, बुद्धि तीव्रतम बनी रहेगी और आत्मा पवित्र बना रहेगा। हमारे भीतर सम्यक दृष्टि का आविर्भाव होगा। इसी लिए मैंने टाइटल में लिखा है ; "अ बन्डरफूल स्टेप, सोइन्ग ध सीड्स ऑफ ब्युटी..!" जीवन में सुंदरता के बीज बोना एक शानदार कदम हैं। 'आनन्दविश्व सहेलगाह' की शब्दयात्रा कुछ शानदार विचार बीज को बोने का काम कर रहा हैं। इससे वैयक्तिक रुप से मुझे आनंद मिल रहा हैं, बस इतना ही..!!!

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बोध इति सर्वैः सह आत्मीयता...!?

Brij Chandrarav  August 2026 Enlightenment is intimacy with all things. Today, I'm blogging on a different topic . I'm trying to con...

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