May 2026 - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Sunday, May 17, 2026

Practice Critical thinking..!
May 17, 20261 Comments

 

Analyze every situations, problems and informations from different angles. you will always get a different perspective.



आलोचनात्मक सोच का अभ्यास करने से हर परिस्थिति, समस्या और जानकारी का अलग-अलग दृष्टिकोण से विश्लेषण करें। इससे आपको हमेशा एक अलग नजरिया मिलेगा।

इस संसार में हमे जन्म से लेकर मृत्यु तक का जो जीवन मिला है यह सबसे बड़ा चमत्कार हैं। हमारी इस कहानी में काफ़ी कुछ होता रहता हैं। उसे मैं 'उथल-पुथल' शब्द कहूं तो चलेगा। हर स्थिति से हम अज्ञात हैं, हर समस्या से बेध्यान हैं और खुशीओं की बौछार से भी अनजान हैं। हाँ, पता है तो आजके लम्हें, अभी जो समय हमारे हाथ में है वो...! माफ करना, समय हमारे हाथ में नहीं, हम समय के हाथ में हैं। समय हमारे साथ चलता हैं या हम समय के साथ चलते हैं।


कुछ भी हाथ में नहीं है फिर भी चलना हैं। आशा और उम्मीद के आशियाने सजाकर हमें समय के साथ चलना हैं। जीवन की भागदौड़ से सीखते हुए और अपने सपने सजाते हुए। विचार और व्यवहार के साथ अपने जीवन की पहचान बनाने के लिए चलना हैं। इस अनजान पथ पर विचार का बड़ा महत्व हैं। 'जो सोचते है' वो हम बनते जाते हैं। विचार प्रक्रिया के साथ...! कुछ अलग करने का मन होता हैं तो आगे जरुर पढ़े, ये मेरी छोटी-सी गुजारिश हैं। Critical thinking..! 'आलोचनात्मक सोच' का अभ्यास करे। क्या हैं ये आलोचनात्मक सोच ?

"किसी भी जानकारी विचार या परिस्थिति का निष्पक्ष और तर्कसंगत विश्लेषण करने की क्षमता को हम आलोचनात्मक सोच कहते है।" बिना सोचे-समझे या मानने के बजाय ठोस साक्ष्य का स्वीकार करना या विश्लेषण और तार्किक मूल्यांकन के आधार पर सही और गलत का निर्णय लेना हैं। इससे लाभ होगा या नुकसान इसमें पड़ने की कोई वजह नहीं हैं। इसलिए सत्वशील विचार विमर्श के साथ जायेंगे तो ठीक रहेगा।

For steps of critical thinking.
Analysis.
विश्लेषण : विचार और तथ्यों को गहराई से समझना हैं।
Evaluation
मूल्यांकन : विचार के स्रोत की विश्वसनीयता की जाँच- पड़ताल करना हैं।
Inference
निष्कर्ष या अनुमान : उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही तार्किक परिणाम तक पहुँचना हैं।
Self-Regulation
स्वयं अवलोकन : अपने स्वयं के पूर्वग्रह और भावनाओं को अलग रखकर सोचना हैं।

जिंदगीभर हमें विचार के साथ चलना है और उसके मुताबिक हमारे जीवन को व्यतीत करना हैं। ठीक ढंग से या दमदार तरीके से जीना है इसलिए विश्लेषण करना हैं, मूल्यांकन करना हैं, अनुमान करना हैं; या फिर स्वयं का अवलोकन करना हैं। विचार एक जबरदस्त प्रवाह हैं। इस प्रवाह में हमें तैरना हैं। ज़िंदगी की खुशहाली को ढूंढना होगा।

¤ जीवन केसे व्यतीत होग़ा ?
¤ क्या क्या मुसीबतें झेलनी पड़ेगी ?
¤ अच्छा होगा या बुरा ?
¤ मेरे सपने सच हो पाएंगे या नहीं ?

ऐसे सवालों के उत्तर खोजने में जिंदगी गंवाए बिना, नीचे दिए गये सवालों पर गौर करना होगा। मैं समझता हूं यही Critical thinking..! या फिर 'आलोचनात्मक सोच' हैं। हमें अपने जीवन का एक अलग ही नज़रिया चाहिए। इसके लिए हम तैयार हैं क्या !?

¤ मैं क्या कर सकता हूं ?
¤ समस्या से कैसे निपटा हैं ?
¤ मेरे दृष्टिकोण को कैसे ठीक किया जा सकता हैं ?
¤ मेरी सोचने की गति को किस दिशा में ढ़ालना हैं ?

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.world
Dr.brij59@gmail.com
+91 9428312234





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Wednesday, May 6, 2026

The decision is in your hands.
May 06, 20261 Comments

If you want to do something big in your life then run like a DEER.


"जिंदगी में कुछ बडा करना है तो 'हिरणवाली' दौड लगाए..!"


हिरण को अक्सर हम नाज़ुक कोमल और भयभीत पशु के रुप में देखते आए हैं। अपनी सुंदरता के कारण एवं अपनी मनोहर चाल के कारण उसको थोड़ा-बहुत भाव मिला हैं। किसी स्त्री की अच्छी चाल को 'हिरनी जैसी चाल' कहते सुना होगा। हिरण को हम सुंदरता और कोमलता के प्रतीक के रूप में मानते हैं। अपना सोने जैसा रंग और मासूम चेहरा हिरण को जंगल की खुबसूरती का एक मुकाम बनाती हैं। इस सुंदरता के पीछे एक ओर कहानी भी हैं, 'चपलता और प्रयास की कहानी...!' खुद को बचाने की एक बेहतरीन दौड़ की कहानी..! अपने प्रयास में जी-जान लगा देने की कहानी...! और सफलता की सांसो के बीच आनंद की कहानी..!


एक जंगल की कहानी सुनाता हूं। शेर अक्सर हिरण का शिकार करता हैं। जब शेर हिरण के पीछे पडता हैं तब हिरण खूब भागता हैं। इस दौड में शेर को अपनी भूख मिटानी हैं और हिरण को अपनी जान बचानी हैं। जंगल में यह घटना बार-बार होती रहती हैं। इस दौड़ में शेर को हरबार सफलता नहीं मिलती। जब शेर किसी हिरण का शिकार करता है तब सो में से दस-पंद्रह बार ही सफल हो पाता है। लगभग पचासी बार उसे हार का सामना करना पड़ता है। मतलब हिरण शेर के हमले से बार-बार बचता हैं, कहो ना कि जीतता है।

यह सुनकर हैरत होती हैं ना !?
हिरण जैसा मासूम और डरपोक जानवर शेर जैसे खूंखार और जंगल के राजा से कैसे जीत पाता हैं ?

इन दो सवाल के उत्तर में हमारा भी 'जीवविज्ञान' छीपा हैं। हिरण इसलिए जीत जाता है कि वह जान बचाने के लिए दौड़ लगाता है। अपने वजूद को बचाने के लिए दौड रहा होता है। जबकि शेर अपनी भूख मिटाने के लिए भाग रहा होता हैं। ये दो घटनाएं हमे काफी-कुछ सिखाती हैं। ध्यान को भंग किए बिना इन दो सवाल और दो जवाब के बारे में विचार करें। इनमें हमारे जीवन की काफी-कुछ घटनाओं का तालमेल दिखाई पड़ेगा। मनुष्य के रूप में हमारे आसपास भी यही हो रहा हैं, ऐसा जरुर प्रतित होगा। मनुष्य के रूप में हमारी भी एक दौड हैं। हम सब भी भाग रहे है, सुबह से लेकर शाम तक..! अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हम भाग रहे हैं। धन-दौलत, शानो-शौकत के पीछे भाग रहे हैं। ये शेर की दौड जैसा ही हैं, अपनी भूख को पूरा करने की दौड जैसा ही है।

एक तरफ किसीको अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए भागना पड़ता हैं। डर के माहौल में अपने भीतर के कोमल भावों को बचाए रखना हैं। अपनी सुंदरता को बचाए रखना हैं। अपने सपने को पूरा करना हैं, अपने छोटे वजूद को बड़ा करना हैं। जंगल के सौंदर्य की तरह जिंदगी के मानवीय पहलू को स्थापित करने के लिए हमेंशा दौडते रहना है। वैसे लोग इस धरती की सुंदरता हैं। हिरण की तरह उन्होंने अपनी दौड में सबकुछ लगा दिया है। अपनी मेहनत, जिद्द और जीने का वजूद और अस्तित्व..! यह सबकुछ लगाते लोग विश्व की सबसे बड़ी सुन्दरता हैं। जिसके पास हारना मतलब मौत ही हैं, उसको तो 'हिरणवाली' दौड लगानी ही होगी।

विशाल दुनिया में मानवीय वर्तन-व्यवहार की विशिष्टताओं के बीच ये सब दिख रहा हैं। जो वैयक्तिक रुप से धनसंपदा या अपनी कुलीनता से बेहतर हैं, उसे किसीके सपनो को रोंदना नहीं हैं। उनके अस्तित्व को संकट में डालना कितने प्रतिशत ठीक होगा..!? विचार करने योग्य बात लगती हैं।

हम इन दो स्थितिओं में कहां पर खड़े हैं ?
हमें किसीको भगाना हैं कि खुद भागना हैं ?
यह सोचना होगा, याद रखें अपनी सफलता और अपने निर्णय अपने ही हाथो में हैं। डायनासोर की प्रताड़ित वृत्ति और हस्ती आज गायब हैं। एक प्रजाति लुप्त हो गई हैं। छोटे-से कईं सजीव आज भी अपना अस्तित्व बचाए हुए हैं..!!

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
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The Bird of Time...!

' द बर्ड ऑफ टाइम' अरे ओ ! समय के पंछी...! आज भारत के एक पुलकित जीवन पर आधारित ब्लॉग कर रहा हूं। पहले उस महान चरित्र की एक सुप्रसिद्ध...

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