If you want to do something big in your life then run like a DEER.
"जिंदगी में कुछ बडा करना है तो 'हिरणवाली' दौड लगाए..!"
हिरण को अक्सर हम नाज़ुक कोमल और भयभीत पशु के रुप में देखते आए हैं। अपनी सुंदरता के कारण एवं अपनी मनोहर चाल के कारण उसको थोड़ा-बहुत भाव मिला हैं। किसी स्त्री की अच्छी चाल को 'हिरनी जैसी चाल' कहते सुना होगा। हिरण को हम सुंदरता और कोमलता के प्रतीक के रूप में मानते हैं। अपना सोने जैसा रंग और मासूम चेहरा हिरण को जंगल की खुबसूरती का एक मुकाम बनाती हैं। इस सुंदरता के पीछे एक ओर कहानी भी हैं, 'चपलता और प्रयास की कहानी...!' खुद को बचाने की एक बेहतरीन दौड़ की कहानी..! अपने प्रयास में जी-जान लगा देने की कहानी...! और सफलता की सांसो के बीच आनंद की कहानी..!
एक जंगल की कहानी सुनाता हूं। शेर अक्सर हिरण का शिकार करता हैं। जब शेर हिरण के पीछे पडता हैं तब हिरण खूब भागता हैं। इस दौड में शेर को अपनी भूख मिटानी हैं और हिरण को अपनी जान बचानी हैं। जंगल में यह घटना बार-बार होती रहती हैं। इस दौड़ में शेर को हरबार सफलता नहीं मिलती। जब शेर किसी हिरण का शिकार करता है तब सो में से दस-पंद्रह बार ही सफल हो पाता है। लगभग पचासी बार उसे हार का सामना करना पड़ता है। मतलब हिरण शेर के हमले से बार-बार बचता हैं, कहो ना कि जीतता है।
यह सुनकर हैरत होती हैं ना !?
हिरण जैसा मासूम और डरपोक जानवर शेर जैसे खूंखार और जंगल के राजा से कैसे जीत पाता हैं ?
इन दो सवाल के उत्तर में हमारा भी 'जीवविज्ञान' छीपा हैं। हिरण इसलिए जीत जाता है कि वह जान बचाने के लिए दौड़ लगाता है। अपने वजूद को बचाने के लिए दौड रहा होता है। जबकि शेर अपनी भूख मिटाने के लिए भाग रहा होता हैं। ये दो घटनाएं हमे काफी-कुछ सिखाती हैं। ध्यान को भंग किए बिना इन दो सवाल और दो जवाब के बारे में विचार करें। इनमें हमारे जीवन की काफी-कुछ घटनाओं का तालमेल दिखाई पड़ेगा। मनुष्य के रूप में हमारे आसपास भी यही हो रहा हैं, ऐसा जरुर प्रतित होगा। मनुष्य के रूप में हमारी भी एक दौड हैं। हम सब भी भाग रहे है, सुबह से लेकर शाम तक..! अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हम भाग रहे हैं। धन-दौलत, शानो-शौकत के पीछे भाग रहे हैं। ये शेर की दौड जैसा ही हैं, अपनी भूख को पूरा करने की दौड जैसा ही है।
एक तरफ किसीको अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए भागना पड़ता हैं। डर के माहौल में अपने भीतर के कोमल भावों को बचाए रखना हैं। अपनी सुंदरता को बचाए रखना हैं। अपने सपने को पूरा करना हैं, अपने छोटे वजूद को बड़ा करना हैं। जंगल के सौंदर्य की तरह जिंदगी के मानवीय पहलू को स्थापित करने के लिए हमेंशा दौडते रहना है। वैसे लोग इस धरती की सुंदरता हैं। हिरण की तरह उन्होंने अपनी दौड में सबकुछ लगा दिया है। अपनी मेहनत, जिद्द और जीने का वजूद और अस्तित्व..! यह सबकुछ लगाते लोग विश्व की सबसे बड़ी सुन्दरता हैं। जिसके पास हारना मतलब मौत ही हैं, उसको तो 'हिरणवाली' दौड लगानी ही होगी।
विशाल दुनिया में मानवीय वर्तन-व्यवहार की विशिष्टताओं के बीच ये सब दिख रहा हैं। जो वैयक्तिक रुप से धनसंपदा या अपनी कुलीनता से बेहतर हैं, उसे किसीके सपनो को रोंदना नहीं हैं। उनके अस्तित्व को संकट में डालना कितने प्रतिशत ठीक होगा..!? विचार करने योग्य बात लगती हैं।
हम इन दो स्थितिओं में कहां पर खड़े हैं ?
हमें किसीको भगाना हैं कि खुद भागना हैं ?
यह सोचना होगा, याद रखें अपनी सफलता और अपने निर्णय अपने ही हाथो में हैं। डायनासोर की प्रताड़ित वृत्ति और हस्ती आज गायब हैं। एक प्रजाति लुप्त हो गई हैं। छोटे-से कईं सजीव आज भी अपना अस्तित्व बचाए हुए हैं..!!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.world
Dr.brij59@gmail.com
+91 9428312234

No comments:
Thanks 👏 to read blog.I'm very grateful to YOU.