April 2026 - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Sunday, April 26, 2026

'तुम तो हर गीत में शामिल थे तरन्नुम बनके..!!'
April 26, 20260 Comments

It is a melodious and pleasant sounding word.

'तरन्नुम' एक मधुर और सुरीला शब्द है।

पूरा ब्रह्मांड ध्वनि से भरा हैं। ध्वनि से कईं जीवन आकारित हुए हैं। समग्र जीवसृष्टि को अपने-अपने ध्वनि हैं। सजीव नहीं है, उनके भी ध्वनि हैं। प्रकृति का अपना ध्वनि हैं। नदी और झरने भी अपने ध्वनि से संभृत हैं। हरेक वृक्ष को भी अपना ध्वनि हैं। पंछीओं की दुनिया तो ध्वनि का सागर हैं। आसमान की शून्यता में भी ध्वनित छाया हैं। हम उसे शांति से भरा कहते हैं लेकिन वो शांति भी एक ध्वनि हैं।



अभी एक गीत सुनने में आया। 'स्विकार किया मैंने' (१९८३) हिन्दी फिल्म का वो गीत था। उस गीत के गीतकार निदा फाज़ली और गायक स्वर सम्राज्ञी कुमारी लता मंगेशकर हैं, संगीतकार हैं उषा खन्ना। पहले इस गीत को पढ़े..!

अजनबी कौन हो तुम ! जबसे तुम्हे देखा है..!
सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आयी है।
तुम तो हर गीत में शामिल थे तरन्नुम बनके,
तुम मिले हो मुझे फूलों का तबस्सुम बनके,
ऐसा लगता है के बरसों से शनासाई है।
ख्वाब का रंग हकीकत में नजर आया है,
दिल में धड़कन की तरह कोई उतर आया है..!
आज हर सांस में शहनाई सी लहराई है।
कोई आहट सी अंधेरो में चमक जाती है,
रात आती है तो तनहाई महक जाती है
तुम मिले हो या मुहब्बत ने गज़ल गाई है..!

इस गीत से मुझे 'तरन्नुम' शब्द बहुत ही पसंद आया। बस में पड़ गया उसके पीछे। 'तरन्नुम' Tarannum का हिंदी अर्थ धुन, लय, स्वर, माधुर्य, गीत या 'संगीतमयता' ऐसा होता है। यह उर्दू और फारसी मूल का शब्द है, जो अक्सर शायरी या गानों को लयबद्ध तरीके से गाने या पढ़ने (तराना) के संदर्भ में प्रयोग में लिया जाता है। यह एक 'सुरमई और सुखद' ध्वनि को दर्शाता है। तरन्नुम एक 'क्लासिक वर्ड' हैं। गीत का मुख्य भाव 'प्रेम की बेशुमार अनुभूति' को महसूस करवाता हैं। शब्द की कमनीयता 'तरन्नुम' हैं, माधुर्य से भरी अनुभूति हैं। जैसे एक गीत में 'मधुरता और सुरीलापन' व्याप्त हो तो वो शब्द कालजयी बन जाते हैं। हिन्दी सिनेमा जगत में कईं गीत आज भी बेशुमार ख़ुशीओ की फुहार लेकर आते हैं। जैसे सावन की हर बूँद हरबार नईं लगती हैं, उसकी खूशबू कायम दिल को छू लेनेवाली होती हैं। वैसे ही उन सदाबहार गीतो के बारे में कहा जायेगा।

ईस गीत का और एक शब्द भी सुहाना हैं..'तबस्सुम' उसका अर्थ मुस्कान, मृदुहास या मंद-हँसी होता है। यह भी अरबी मूल का एक सुंदर शब्द है। प्रसन्नता और बिना आवाज़ की होठों की मंद-मंद मुस्कराहट को दर्शाता है। इस शब्द का उपयोग साहित्य में अक्सर प्रेम के भाव चेहरे से खुशी ज़ाहिर करते हैं, उसे दर्शाने के लिए किया जाता है। गीत की खुबसूरती कभी खत्म नहीं हो सकती। इन दो शब्दो की बात गहराई से समझ ते हैं तो शब्द से प्यार हो जाता हैं। मानो 'एस्ट्रिम लेवल' के भाव को भीतर में सहलाने वाले ये शब्द बन गए हैं। कोई बेहतरीन समय पर की गई 'निदा फाज़ली' की ये शब्द साधना की पड़छाई कभी धुंधली नहीं पड़ती। प्रेम 'पूजा के फूल' की तरह यहां एक अद्भुत अलौकिक रुप को धारण किए हम अनुभूत करते हैं।

एक ओर शब्द देखे 'शनासाई'..! उसका अर्थ है जान-पहचान, परिचय, वाक़फ़ियत, या किसी को जानने की अवस्था। यह भी एक फ़ारसी मूल का स्त्रीलिंग शब्द है। एक ओर अर्थ में देखे तो 'घनिष्ठता' या किसी व्यक्ति के साथ संबंध दर्शाने के लिए भी इसकी प्रयोजना की जाती है। शब्द और ध्वनि का मेल ध्यान बन गया हैं, जैसे मुहब्बत ने गज़ल गाई हैं..!

इस गीत के जरिए मुझे कुछ शब्द की मधुरता को आप तक पहुंचाने के मन था। वैसे तो इसे समझने में मुझे बहुत ही आनन्द मिला हैं। उसे कुछ शब्दों के जरिए बांटता हूं। पसंद आए तो आप भी इसे बाँटना..! 'तरन्नुम'-'तबस्सुम' और 'शनासाई' शब्द के गरिमामय वैभव को महसूस करते रहना हैं। इसे कौन पढ़ रहा हैं ये मुझे मालूम नहीं हैं।
बस इतना कहता हूं...अजनबी कौन हो तुम..!

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
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Sunday, April 19, 2026

The real friendship..!
April 19, 20260 Comments

Aristotle taught that there are three kinds of FRIENDSHIP.

अरस्तू ने सिखाया कि मित्रता तीन प्रकार की होती है।

दोस्त, मित्र, सखा, साथी, यार, संगी और सहचर शब्द के अर्थ एक ही हैं। ये शब्द स्नेह, विश्वास और साथ रहने का अदम्य भाव प्रकट करनेवाले हैं। दोस्त और दोस्ती के बारे में काफ़ी कुछ कहा गया हैं, लिखा गया हैं। साहित्य में भी कईं काव्य-कथावार्ताएं मिलती हैं। फिल्म जगत में भी कईं फिल्मों के सब्जेक्ट्स 'दोस्त और दोस्ती' आधारित होते हैं। मनुष्य जीवन के ईस सुंदर संबंध के बारे में कुछ लिखने का प्रयास करता हूं। यह ब्लॉग मेरे जीवन के सभी दोस्तो के नाम करते हुए आनंदित भी हूं। अरस्तू की तीन प्रकार की मित्रता की बात को विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं। उनके तीन प्रकार में,


1.
friendship of utility based on benefit.
● लाभ पर आधारित उपयोगितावादी मित्रता।
संबंध की सबसे बूरी बात हैं उसमें बेनिफिट देखना हैं। मनुष्य के रुप में कईं संबंध 'बायोलोजीकल' रुप से होते हैं। जैसे कि माता-पिता-भाई-बहन वगैरह...लेकिन मित्रता के संबंध में अपनी खुद की पसंद नहीं होती हैं। दो व्यक्ति जब अनायास मिलते हैं और उनके बीच गहराई वाला रिश्ता निर्माण हो जाता हे, तब 'दोस्ती' जन्म लेती हैं।  इस प्रकार के पवित्र बंधन में लाभ या बेनिफिट का विचार करना कैसे ठीक होगा ? फिर भी संसार में ये संभव हो रहा हैं। इससे लाभ किसको मिलता हैं ये भी हम भलीभांति जानते हैं। लेकिन जो रिश्ता हमारी मर्ज़ी से हुआ हैं उसके बारे में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।

2.friendship of pleasure based on enjoyment.
● आनंद पर आधारित आनंदवादी मित्रता।
कोई ऐसा साथ जो हमें आनंद देता हैं। उसके साथ समय बिताना हमें अच्छा लगता हैं। उसके आने से मानो हमारी परेशानियाँ खत्म सी हो जाती हैं। हम किसी भी स्थिति में उसे याद करते हैं। वो हाजिर होता हैं। वो हमारा विश्वास बन जाता हैं ऐसी मित्रता आनंद पर आधारित हैं। पहेले प्रकार से ये अच्छी मित्रता कहलायेगी। जीवन के अच्छे मुकाम के लिए ऐसा कोई संबंध बेशक जरुरी हैं। स्वार्थ से परे केवल आनंद के लिए बनाया गया रिश्ता नुकशानकारक कभी नहीं रहेगा। भले उससे लाभ हो या न हो। इसलिए आनंद सबसे बड़ी बात हैं।

3.True friendship based on virtue.
● सद्गुण पर आधारित सच्ची मित्रता।
कईं रिश्ते समझ से बाहर होते हैं। कभी हमें भी समझ में नहीं आता। दूसरों को समझने की तो बात ही नहीं हैं।
वो रिश्ता क्यों है ?
इससे क्या लाभ हैं ?
मैं क्यो उसके करीब रहना पसंद करता हूँ ?
उसके बगैर जीवन में कुछ कमी महसूस क्यो होती है ?

इन सवालो का खडा होना जहाँ मुमकिन ही नहीं वो रिश्ता, वो मित्रता सबसे सुंदर हैं। जिसमें केवल हृदय का बंधन हैं। मिलने की उम्मीदें कायम रहती हैं। बस बातें करते रहेना..! उसके साथ समय बिताना..! इसका का कोई अंत नहीं होता। मन में ऐसा क्यो हो रहा है ऐसा संदेह भी नहीं उठता। उसके साथ केवल जीने का मन करे ऐसा रिश्ता ईश्वर की कृपा से ही संभव होता हैं। 'बेस्ड ओन वर्च्यु' इसे कहते हैं।

इन तीन प्रकार के मैत्री संबंध को मैं कोई 'जेन्डर बायस' या किसी दूसरे पूर्वग्रह से परे देख रहा हूं। यहां केवल व्यक्ति की मनुष्य की बात हैं। कोई फिलसूफी नहीं हैं, किसी धर्म-संप्रदाय के बंधन नहीं हैं। ये बात इक्वालिटी से परे जाकर समझ में आएगी। जहाँ केवल अपनापन पनपता हैं। जहाँ केवल प्रेम जी रहा होता हैं। जहाँ केवल ईश्वर की ही मर्जी कायम रहती हैं।

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
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Wednesday, April 1, 2026

I will want to change myself..!
April 01, 20260 Comments

Change yourself the world will change.

हमारे महात्मा गांधी की "खुद को बदलो, दुनिया बदलेगी" यह सैद्धांतिक रूप की मान्यता है।

Your own resonance can alter the world around you.
आपकी स्वयं की प्रतिध्वनि आपके आस-पास की दुनिया को बदल सकती है।

इसे पढ़कर मस्तिष्क में झनझनाहट पैदा होती है तो आगे पढ़ना जरुरी हैं। बात शुरु करने से पहले मैं कुछ ऐसा कहता हूँ। क्योंकी ये बात आगे पढने से समझ में आ जाएगी।

उल्लू बनो...!
अरे भाई क्यो बनना हैं उल्लू ?

संसार में उल्लू एक ऐसा पक्षी है जिसे दिन कि अपेक्षा रात में अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ता है। उन्हें रात का पक्षी (Nocturnal Birds) कहा जाता हैं। अपनी बड़ी आंखे उसकी पहचान हैं। जैसे बड़ी आंखें बुद्धिमान व्यक्ति की निशानी होती है। वैसे उल्लू को भी बुद्धिमान माना जाता है। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है पर कुछ प्रचलित पौराणिक मान्यतावाली कहानियों में उल्लू को बुद्धिमान माना गया है। एक ओर विशेषत में उल्लू अपनी गर्दन पूरी तरह से घुमा सकता है। इसके कान बेहद ही संवेदनशील होते हैं। रात में जब कोई शिकारी जानवर थोड़ी-सी भी हरक़त करता है, तो इसे तुरंत पता चल जाता है। और उसे वो दबोच लेता है। इसके पैरों में नाखूनों-वाली चार अंगुलियां होती हैं। इसके कारण शिकार को दबोचने में उसे विशेष सुविधा मिलती है। चूहे इसके विशेष शिकार होते हैं।


प्राचीन यूनानियों में बुद्धि की देवी, एथेन के बारे में कहा जाता है कि वह उल्लू का रूप धारण करके पृथ्वी पर आई हैं। भारतीय पौराणिक कहानियों में भी यह उल्लेख मिलता है कि उल्लू धन की देवी 'लक्ष्मीमाता' का वाहन है।  हिन्दू संस्कृति में माना जाता है कि उल्लू समृद्धि और धन लाता है। एक ओर भी मान्यता चल रही है कि इन्सान की मृत्यु का समय उल्लू को पहले से पता चल जाता है। और तब वो आसपास के पेड़ो पर अक्सर आवाज़ लगाने लग जाते हैं।

एक तो उल्लू निशाचर पंछी है, जो अपनी बड़ी आँखे और गोल चेहरे के कारण बहुत प्रसिद्ध है। साथ में उल्लू के पंख बहुत ही मुलायम होते हैं, इसके कारण रात के सन्नाटे में उड़ते समय आवाज़ नहीं होती। ये बहुत ही कम रोशनी में भी देख लेते हैं। रात में उड़ान और शिकार में उसे कोई परेशानी नहीं होती। धरती पर जैविक संतुलन बनाने में उल्लू की अहम भूमिका है। चूहे-छछूंदर और हानिकारक कीड़े मकोड़ों का शिकार करने के कारण इन्हें प्रकृति के 'सफाईकर्मी भी कहेते हैं। शायद इसी कारण हमारे पड़ोसी देश मलेशिया में किसान फसल बचाने के लिए उल्लू पालते हैं।

उल्लू अन्धकार में स्पष्ट देख सकता हैं और अपनी दिशा तय कर सकता है। वह संसार के शोर से दूर रहकर अपने भीतर के अंधकार को देखता है। यह बताता है कि वास्तविक बुद्धिमत्ता जो अंधकार यानि अज्ञानता में से प्रकट होती हैं। संकट में से सही निर्णय लेने को बुद्धिमत्ता कहते हैं। साथ ही उल्लू शांत, धैर्यवान और एकाग्रचित होता है। इस बात के साथ हम थोड़ी सहमति जताए तो...धन प्राप्ति के लिए विवेक-धैर्य और मौन का बड़ा महत्व हैं। चुपचाप कर्म करो और अंधकार में से प्रकाश खोजने की मनसा रखो। इस तरह उल्लू तो शक्ति और दूरंदेशी का प्रतीक हैं, ऐसा समज में आता है। माता लक्ष्मीजी ने उल्लू को अपना वाहन क्यों बनाया हैं ? अब ये सहज ही समझ में आ जाएगा।

अपने जीवन के ध्वनि को सुनना हैं तो शांत बनना पड़ेगा। मैं संसार को बदलने के लिए नहीं निकला हूँ। मैं खुद को बदलने निकला हूँ। इस प्रक्रिया के दौरान जो कुछ परिवर्तन आते हैं उसे शांत होकर आनंद पूर्वक स्वीकार करना हैं। इससे बाहरी दुनिया में क्या परिवर्तन आते हैं उससे मुझे अधिक निस्बत नहीं हैं। मुझे Change ourselves खुद को बदलें में आनंद मिलता हैं। मैं इसे जीवन का मूलभूत आनंद कहते हुए मन से भर रहा हूं।

उल्लू की अपनी निजी दुनिया हैं, अंधकार से भरी तो अंधकार से...! लेकिन अपनी दृष्टि को स्थिर रखना-स्पष्ट रखना ये बहुत जरुरी हैं। शांत होकर स्वयं अपने भीतरी ध्वनि को पकड़ना हैं। ईश्वर ने मुझे जो कुछ क्षमताएँ दी हैं, वही मेरी मूलभूत शक्ति हैं। खूद को महसूस करना हैं। अँधेरे से डरना नहीं है, अँधेरे में छुपे उजियारे को महसूस करना हैं। प्रकृति के शांत स्वर में अपनी उड़ान को खोजना हैं। ये सब करनेवाला एक छोटा-सा पंछी उल्लू हैं...! इसीलिए मुझे उल्लू बनना हैं। हां, मैं उल्लू हूं उल्लू बनना चाहता हूं !!

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Practice Critical thinking..!

  Analyze every situations, problems and informations  from different angles. you will always get a different  perspective. आलोचनात्मक सोच क...

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