VIPASSANA is one of india's most ancient meditation techniques.
विपश्यना भारत की सबसे प्राचीन ध्यान तकनीकों में से एक है।ईश्वर की करामात या फिर पूर्व जन्म के कर्म कहे मुझे अच्छे अनुभवो में से गुजरने का अवसर मिल ही जाता हैं। मेरा वैयक्तिक जानना और सीखने का स्वभाव भी इस आनंद क्षण के लिए निमित्त रहा हैं। एक ऐसा ही संयोग मेरे जीवन में आया, कुछ अनुभव साझा करुं इससे पहले थोडी जानकारी विपश्यना के बारें में...!
बर्मा में से शुरु हुई एक अद्भुत साधना ने आज एक विशेष मुकाम हासिल कर लिया हैं। लेकिन ये साधना विधि तो हमारे प्राचिन भारत की ही देन हैं। लगभग पच्चीस शतक पहेले भारत में हुए भगवान बुद्ध ने इसका अनुसरण करके हमें इस 'विपश्यना साधना विधि' से अवगत करवाया था। काल की कुछ विषैली घटनाओं ने प्राचीन विपश्यना साधना को नष्ट कर दिया था। हम जानते हैं की भारत में गौतम बुद्ध के द्वारा बौद्ध परंपरा विश्व के काफ़ी कुछ देशों में पहुंची हैं। शरीर और मन की गहराई को अनुभूत करने से जो स्पष्टता मिलती है वही उत्तम जीवन हैं। भगवान बुद्ध वो अनुभूति के महासागर हैं। इसके कारण ही चीन-नेपाल, बर्मा-जापान, इन्डोनेशिया, म्यांमार से लेकर श्रीलंका तक यह करुणामय बौद्ध विचार पहुंचा था।
आज 'विपश्यना' आचार्य सत्यनारायण गोयन्काजी के अथक प्रयास से पूरे विश्व में आकर्षण पैदा कर रही हैं। गोयन्काजी १९२४ में बर्मा में जन्मे थे। लेकिन उनका परिवार मूलभूत रूप से भारत के राजस्थान से था। बर्मा सरकार के महालेखाकार सयाजी-उ-बा खिन ने गोयन्काजी को इस विधि से अवगत कराया था। मनुष्य जीवन की अध्यात्मिक गहराई से झुडी ध्यान की यह साधना विधि हैं। अपने हिन्दु होने के गौरव को बचाने की भ्रांति में सत्यनारायण गोयनका ने १ सितंबर १९५५ को विपश्यना की पहली शिविर की। केवल सांस के आवागमन को देखते रहेना और चित्त की मूलभूत अवस्था को दृष्टाभाव से देखते रहेना। उन्होने शील पालन के लिए कठोरता पूर्वक संयमित १० दिन शिविर में बिताए। साथ ध्यान विधि में 'आर्यमौन' का पालन भी करना था। आर्यमौन का मतलब 'इशारे और नजर' से भी किसी दूसरे व्यक्ति से अनुसंधान नहीं करना हैं। गोयन्काजी के लिए शिविर का अनुभव द्विजत्व से कम नहीं था। उनके विचारो में स्पष्टता आने लगी थी। कईं भ्रांतियां टूटने लगी थी। वास्तविक स्थिति सामने स्पष्ट हो रही थी। परंपरागत मान्यताओं की समझ बढ़ने लगी थी। भारत का एक व्यक्ति भारत के प्राण के संपर्क में आ रहा था।
बाद में गोयन्काजी ने आचार्य सयाजी के मार्गदर्शन में १४ साल की कड़ी तपस्या की। गुरुजी ने प्रेमाआदर से और गोयनकाजी की विकसित प्रज्ञा को देखते हुए गृहस्थ आचार्य पद पर नियुक्त किया था। साथ उन्होंने ऐसी श्रद्धा व्यक्त की "भगवान बुद्ध के कारण यह ध्यान साधना विधि हमें मिली हैं, हम इसे भारतभूमि का बर्मा के उपर ऋण समझते हैं। मैं इच्छुक हूं की आप भारत में यह विपश्यना विधि को पुनः प्रस्थापित करें और हमें भारत से ऋण मुक्त करें।" बौध उपासक सयाजी उ-बा-खिन के ऐसे सद्भाव से 'विपश्यना ध्यान विधी' सत्यनारायण गोयन्काजी के निमित्त से भारत में पुन:स्थापित हो रही हैं।
The Buddha said, a mediator practises ardently, without neglecting for a moment awareness and equanimity towards sensations, such a person develops real wisdom, understanding sensations completely.
भगवान बुद्ध ने कहा है, "जब कोई ध्यान करने वाला व्यक्ति चेतना और इंद्रियों के प्रति समभाव को क्षण भर के लिए भी उपेक्षित किए बिना लगन से अभ्यास करता है, तो ऐसा व्यक्ति सच्ची बुद्धि विकसित करता है और इंद्रियों को पूर्णतः समझ लेता है।" इन शब्दो की विश्वसनीयता क्या हैं तो कह सकते हैं, स्वयं भगवान बुद्ध...! इन शब्दो के आधार पर विपश्यना आज आचरण बनकर उभर रही हैं। हमारी उच्चतम परंपरा की झड़े कितनी गहरी है उसे मिटाना असंभव हैं। स्वार्थवश समाज और सत्य से पराभूत समाज कुछ समय के लिए इसे नुकसान कर सकता हैं। इसे मिटा नहीं सकता..! संसार में बुद्ध पैदा होते ही रहेंगे। शायद इसे हम प्रकृति का अमर फ़रमान भी समझ सकते हैं।
बुद्ध की जीवन के प्रति करुणा, शांति और समता के विचार को अनुभूत करना संभव हुआ है, विपश्यना ध्यान साधना के द्वारा ऐसे प्रमाण मिल रहे हैं।
विपस्सना शब्द दो भागों से मिलकर बना है। 'वि' का अर्थ है 'स्पष्ट' और पस्सना का अर्थ है देखना। 'स्पष्ट रुप से देखना, वस्तु या घटना को वास्तविक रुप में देखना ऐसी एक समझ विकसित होती हैं। इसे 'अंतर्दृष्टि ध्यान' के रूप में अनुवादित कीया जा सकता है, साथ इसे मनुष्य और प्रकृति की साम्यता से भी समझा जा सकता हैं।
अतुलित अनुभव...और मेरे वैयक्तिक जीवन की पहचान कराने का अद्भुत अनुभव हुआ। बार-बार इस चित्तशुद्धि की विधि में आनंद करने का मन हो रहा हैं। अनुभूत गंगा-सागर में तैरने का एक अवसर कहते हुए अपना कृतज्ञभाव प्रकट करता हूं। भारत के मूलभूत प्राण को स्पर्श करने का अवसर विपश्यना के कारण संभव होगा ऐसी श्रद्धा प्रकट करते हुए..!
भवतु सब्ब मंगलम् !!
May all beings be happy...be peaceful, be liberated..!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.org
dr.brij59@gmail.com
+91 942831234

Dr BRIJESH CHANDARRAW
ReplyDeleteYou advantage of Vipassana meditation sakariya
I missed the opportunity. I missed that opportunity because of the work of SIR.
Yoga message 👍👍👍
When all the weapons of the world are destroyed new weapons will be created through yoga.. I learned that from Bala A Vipassana center in Kutch.. MANDVI 👍👍👍
Dr BRIJESH CHANDARRAW
ReplyDeleteYou advantage of Vipassana meditation sakariya
I missed the opportunity. I missed that opportunity because of the work of SIR.
Yoga message 👍👍👍
When all the weapons of the world are destroyed new weapons will be created through yoga.. I learned that from Bala A Vipassana center in Kutch.. MANDVI 👍👍👍
આ વિધિ થી ભગવાન બુદ્ધ નિર્વાણ પામ્યા.
ReplyDeleteविपश्यना की दुनियां में आपका स्वागत हैं। बहुत खूब लिखा आपने। सबके लीए कल्याणकारी विद्या का अनुभव और जिक्र किया आपने। सबका मंगल हो।
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