Our lighting life...! - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Monday, December 22, 2025

Our lighting life...!

कैसे हमारी प्रकाशमान ज़िंदगी बनाए रखे...!

Be a light unto yourself.

स्वयं अपने लिए प्रकाश बनो..!

हमारी ज़िंदगी अनोखे अवसर से कम नहीं हैं। मनुष्य के रुप में हमें ये अद्भुत अवसर मिला हैं। इसे कैसे सजाया जा सकता हैं ? प्रकाशमान स्थिति को बनाए रखने के लिए कैसे प्रयास करने चाहिए ? इसके मार्ग बताऊंगा ऐसा मत समझना। क्योंकि सभी मनुष्य खुद अपने जीवन का मार्ग हैं। मनुष्य के रूप में हमें क्या करना चाहिए या नहीं करना चाहिए उसके बारें में नित्य ही भीतरी आवाज उठती रहती हैं। लेकिन भाग दौड़ भरी जिंदगी में कुछ छूट जाता है तो उसे याद करवाने का छोटा-सा काम इस ब्लोग के जरिए करता हूं। विश्व में विपश्यना के प्रसारक सत्यनारायण गोयन्काजी के प्रवचन में मुझे ये बात सुनने में आई। बात बहुत अच्छी है, तो उसे बाँट रहा हूं।


मनुष्य की जीवन गति इन चार बातों पर निर्भर हैं। जन्म से जो स्थिति मिलती है उसे हम बदल नहीं सकते। मगर हमारी अपनी जिन्दगी की चाहत में काफी-कुछ सीख सकते हैं। अपने जीवन से प्यार होना एक बहुत ही सुंदर बात हैं। प्रयास पूर्वक कुछ विशिष्ट करना है, तो कुछ हो सकता हैं। इसके लिए हमारा मन तैयार है, बस इतना जरुरी हैं। गोयन्काजी ने कही चार बातों को आपके सामने रख रहा हूँ। इन चार स्थितियों में हम कौन-सी स्थिति में हैं ? ये हमें ही तय करना पड़ेगा। इन चार स्थितियों में से कहां जाना है ? वो भी हमें ही तय करना हैं।

From darkness to darkness.
अंधकार से अंधकार की ओर
From light to darkness.
प्रकाश से अंधकार की ओर
From light to light.
प्रकाश से प्रकाश की ओर
From darkness to light.
अंधकार से प्रकाश की ओर

गोयन्काजी के विचार की मूल विभावना हमें 'बुद्ध दर्शन' में दिखाई पडती हैं। 'अप्प दीपो भव' ये बुद्ध कालीन पाली भाषा का वाक्यांश है। जिसका अर्थ है 'अपना दीपक स्वयं बनो' या 'खुद का प्रकाश स्वयं बनो' ये बुद्ध की शिक्षाओं का एक महत्वपूर्ण उपदेश कहा जाता हैं। जो हर मनुष्य को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देता हैं। अपनी आंतरिक शक्ति और ज्ञान पर निर्भर रहने को प्रेरित करता हैं। तथा सत्य और सही आचरण के मार्ग पर चलने के लिए भी प्रेरित करता है। भगवान बुद्ध अपने भीतर के प्रकाश मतलब ज्ञान, विवेक और सत्य को खोजने और उस पर विश्वास करने का अद्भुत संदेश देते है।

अब उन चार स्थितिओं को फिर एकबार पढ़ ले। सबसे अच्छी स्थिति वो मनुष्य खुद निर्माण करता है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर गति करता हैं। ये जीवन के ख़ूबसूरत क्षण कहलायेंगे। जो इन्सान जागता हुआ हैं, वो कदापि अंधकार में डूबता नहीं हैं। चाहे कुछ असुविधाओं में जीना पडता हो। अवहेलनाओं में से गुजरना पड़ता होता हो। जन्म के कुछ अमानवीय बंधनों से जूझना पड़ता हो। इसे जीवन का अंधेरा मान ले फिर भी उस इन्सान की नज़र प्रकाश की तरफ रहती हैं। वो कभी हारता नहीं, वो कभी अमानवीय स्थिति के दलदल में फंसता नहीं। ईश्वर ऐसे इन्सान को सही दिशा में पहुंचा ही देते हैं। अंधकार से प्रकाश की ओर...एक मानवीय मुकाम की ओर वो पहुंच ही जाता हैं।

हमारी आज अच्छी हैं, प्रकाशमान है। तो उसको बचाए रखने की या उस स्थिति को बनाए रखने की ज़िम्मेदारी हमारी हैं। आज के उपर ही कल निर्भर हैं। हमारा जीवन अच्छा हैं तो इसे ईश्वर की कृपा समझेंगे। आज ठीक नही हैं फिर भी अच्छा करते रहना हैं। उससे आनेवाला कल बेहतरीन होगा। इन चार बातों में मनुष्य जीवन की प्रकृति बताई गई हैं। हमें हमारी प्रकृति खुद तय करने का अधिकार हैं।

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat
INDIA
drbrijeshkumar.org
dr.brij59@gmail.com
+ 91 9428312234

1 comment:

  1. जीवन को प्रकाशित करने के लिए कुछ सुझाव है लिखें हैं
    हमारे जीवन में आध्यात्मिकता को शामिल करना चाहिए और जैसे कि ध्यान योग या प्रार्थना अपने विचारों को सकारात्मक रखें और नकारात्मकता से दूर रहें अपने जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करने के लिए काम करे
    अपने परिवार, मित्रों और समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करें अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें
    अपने जीवन में सीखने की प्रक्रिया को जारी रखें जैसे कि नई चीजें सीखना और अपने कौशल को विकसित करना
    इन सुझावों को अपनाकर आप अपने जीवन को प्रकाशित कर सकते हैं और एक सुखी और संतुष्ट जीवन जी सकते हैं।।। जे जे एस एल

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Thanks 👏 to read blog.I'm very grateful to YOU.

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When you call on me, when i hear you breathe, I get wings to fly. I feel I'm alive. lofilulla. जब तुम मुझे पुकारते हो, जब मैं तुम्हारी ...

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