सुंदरता के बीज..!!
Kindness, compassion, hope, love, peace are seeds of beauty.
जीवन जटिल है, फिर भी सुंदर हैं। एकबार जीवन की गहराईयों से कैसे निपटना हैं यह समझ में आ गया तो फिर आनंद ही आनंद हैं। आज ऐेसे एक कदम की बात करता हूं।
sowing the seeds of beauty. सुंदरता के बीज बोना..!
एक वाक्य जो आप बारबार पढ़ना चाहेंगे।
"Whenever you are creating beauty around you. you are restoring your soul..!"
"जब भी आप अपने आस-पास सुंदरता रचते हैं, तो आप अपनी आत्मा को फिर से जीवंत कर रहे होते हैं।"
'Healing hearts' एक फेसबुक पेज़ हैं। वहां से दिल को छू लेने वाले काफ़ी सेन्टेन्स मिलते रहते हैं। यहां दिया गया वाक्य मुझे अच्छा लगा। इसकी गहराई तक डूबकी लगाते हैं। 'ब्यूटी ओफ लाईफ' 'जीवन की सुंदरता' से बढ़कर इस संसार में बड़ी बात हो ही नहीं सकती। ईश्वर ने हमें जीवन दिया हैं, मन-बुद्धि दी हैं। हम अच्छा-बूरा सोचने के लिए और उसे एक्शन में प्रक्रिया में लाने के लिए सक्षम हैं। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए हम जीवन के आनंद को खोजते हैं। सही में हमारा जीवन उद्देश्य भी यही हैं। लेकिन जीवन में कईं तरह के भटकाव और ठहराव का सामना करना पड़ता है। इससे जीवन मैं थोड़ी बहुत दिक्कते बढ़ती हैं। मन अस्थिर हो जाता हैं। जीवन का आनंद कहीं पर खो जाता हैं। हम मनुष्य के रुप में कईबार बेबस बन जाते हैं। भौतिकवाद में सुख हैं, समाजवाद में सुख हैं, कोई संगठनात्मक पहलूओ में सुख हैं, कईं आध्यात्मिक गतिविधियाँ चल रही हैं। फिर भी सत्य कहां है ? जीवन में आनंद कहां हैं..!?
सोचने की बात है ना ? हमें अपनी वैयक्तिक शुद्धि के लिए और हमारे भीतरी उत्कर्ष के लिए आसपास की स्थिति का सुधार करना चाहिए। सबको पता है कि इस धरती पर चारों ओर सुंदरता ही सुंदरता हैं। लेकिन हमारे पास उसे देखने का समय नहीं हैं। हम कहीं पर ज्यादा उलझे हैं। कईं प्रकार के काम और हमें क्या मिलेगा !? इसके बीच हम फंसे हुए हैं। शायद बचपन से हमने यही देखा है, या फिर हमें यही सिखाया गया हैं। इसके कारण मनुष्य की जन्मजात शक्तियाँ हम भूल रहे हैं। इस संसार में हमारा जन्म किसी उद्देश्य के कारण हुआ हैं। ईश्वर का कोई भी सृजन अकारण नहीं होता। संसार में हरेक छोटा-सा जीव भी महत्वपूर्ण हैं। फिर हमारी महत्ता कितनी होगी !? मनुष्य को जन्म से मिले शरीर या जीवन का मूल काम आनंद हैं। हरेक मनुष्य की आत्मा अच्छे कार्यो से खुश होती हैं। लगभग ऐसा अनुभव सबका हैं। फिर भी दूसरों की खिंचाई करना, दूसरों की अदेखाई और 'मैं ही श्रेष्ठ हूं' की लडाई लड़ रहे हैं। वैसे तो ये लड़ाई खुद से ही हैं। इसकी समझ काफ़ी देर के बाद आती हैं। जब आसपास काफ़ी-कुछ प्रमाण में गंदगी का ढेर लग चुका होता हैं। तब हम आनंद ढूंढ रहे होते हैं। कैसे मिलेगा आनंद..!?!
हम मनुष्य सबसे सुंदर हैं। पृथ्वी के सारे जीवों में उत्कृष्ट हैं। ईश्वर की सबसे अच्छी, बेनमून कृति हम ही तो हैं। इसी कारण सुंदरता को भूलना हमारी ही मूर्खता हैं। हमारा 'मूलभूत भाव' सुंदरता को बिखेरना ही तो हैं। इससे हमारा मन शुद्ध रहेगा, बुद्धि तीव्रतम बनी रहेगी और आत्मा पवित्र बना रहेगा। हमारे भीतर सम्यक दृष्टि का आविर्भाव होगा। इसी लिए मैंने टाइटल में लिखा है ; "अ बन्डरफूल स्टेप, सोइन्ग ध सीड्स ऑफ ब्युटी..!" जीवन में सुंदरता के बीज बोना एक शानदार कदम हैं। 'आनन्दविश्व सहेलगाह' की शब्दयात्रा कुछ शानदार विचार बीज को बोने का काम कर रहा हैं। इससे वैयक्तिक रुप से मुझे आनंद मिल रहा हैं, बस इतना ही..!!!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat, INDIA
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