When you call on me,
when i hear you breathe,
I get wings to fly.
I feel I'm alive.lofilulla.
जब तुम मुझे पुकारते हो, जब मैं तुम्हारी साँसें सुनता हूँ, मुझे उड़ने के पंख मिल जाते हैं..! मुझे लगता है कि मैं जीवित हूँ..! ● लोफिलुल्ला
कुछ शब्द नहीं होते, धडकन का साज होते हैं। ये शब्द जीवन की यात्रा को बेहतरीन बनाते हैं। ये शब्द भी तो वर्णो का मिलन हैं। और जहां मिलन होता है वहाँ लाजवाब ही घटित होगा। सारे ब्रह्मांड में प्रकृति के सभी पहलूओं में मिलाव ही तो भरा हैं। एक चीज दूसरी चीज से मिलकर एक ओर चीज निर्माण करती हैं। ब्रह्मांड में एकत्व का भाव ही मुख्य हैं, यहाँ समता हैं, संयोजन है और समाहित होना सहज भाव हैं। इसलिए प्रकृति वैविध्य से भरी होने के बावजूद एक ही हैं। उसके सामने 'मनुष्य' शब्द बोले तो कितना कुछ वैविध्य सामने आता हैं। फिर भी मनुष्यों में भी मिलन और प्यार की बात ही भरी है। मनुष्य में भी प्रकृति का एकत्व सहज उठ खडा होता हैं। इसलिए कहे, ईश्वरीय परिकल्पना में 'मिलन' ही केंद्र में हैं।
Thanks andres..for beautiful pic.
हमारी ही बात करते हैं, यानि की मनुष्य की बात करते हैं। मनुष्य का एक मूलभूत स्वभाव हैं उसे अकेला रहना पसंद नहीं हैं। आदिकाल को देख़ें टोली और समूह सहज ही बन गए थे। मनुष्य का समाज और अपनो में रहने का स्वभाव मूलरूप दर्शाता हैं। शायद ये ईश्वर की अनजान करामात भी हो सकती हैं। अपनो में जीना है, तो प्रेम चाहिए। इसलिए प्रेम सबसे जरुरी हैं, ऐसा निश्चित हैं। ईश्वर ही प्रेम है, ऐसा सुनकर हमसब बड़े हुए हैं। मनुष्य को प्रेम में जीना पसंद हैं। अक्सर ये स्वभाव बदलता क्यों है ये मैं नहीं जानता। लेकिन एक बात तो तय है, हमारे मन में कुछ भी पाने की लालसा भले ही ज़्यादा हो। लेकिन प्यार सबको चाहिए..! ये सत्य किसीसे छिपा नहीं हैं।
किसी आवाज से मन भर जाय, किसी आवाज को बारबार सुनने का मन करे या उस आवाज को सुनकर उड़ने का मन हो जाए..! ये बड़ी ही नाजुक हरकतें सभी के नसीब में कतई नहीं होती। इसके लिए शायद मनुष्य के रुप में "जैसा हैं वैसा" या फिर "जैसे ईश्वर के साथ आनंद आता है वैसा" जीना होगा। ऐसी अंतरंगी हरकतें किसी ओर को आपकी ओर खींच लेती हैं..! प्रेम के लिए शायद कोई चाहिए ये भी सच हैं। प्रेम भीतर की धडकन हैं, इसे व्यक्तिगत रुप से सुनना भी फ़ायदेमंद और कोई ओर सुन ले उसके लिए भी लाभप्रद हैं। प्रेम जब पारस्परिक संबंध में झुडता है तो बडा सुंदर लगता हैं। शायद ये लोगो की जुबान बन जाए या एक खुबसूरत लम्हा..! जीने के लिए ये प्यार बड़ी जरुरी चीज हैं। प्यार स्वरुप के बिना, न दिखे फिर भी और चीज न होने के बावज़ूद भी बहुत ही जरुरी हैं।
I feel I'm alive...मैं जीवित हूँ..! ऐसे अहेसास की किमत कोई चुका नहीं सकता। ये अनमोल रिश्ता, ये प्यारा संबंध कैसे बंध जाता है, इसके कारण कितना भी ढूंढो मिल नहीं सकेंगे !! प्यार के साथ जीना जीवन की सबसे बड़ी सफलता हैं। और मनुष्य के रुप में संबंध को समझना सबसे बड़ा व्यवहार हैं। ऐेसे जीव चाहे वो स्त्री हो या पुरुष, बड़े ही भाग्यवान होते हैं या कहलाते हैं..! शायद उनका जीना ईश्वर को भी पसंद आता होगा..! शायद नहीं निश्चित ही पसंद होगा..! एक हिन्दी फिल्म 'किनारा' का ये गीत जो गुलजार ने लिखा हैं, और राहुलदेव बर्मनने संगीत से सजाया हैं..! सुने और आनंद की प्यारी लहर का अनुभव करें..!
'नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जायेगा,
मेरी आवाज़ ही, पहचान है गर याद रहे..!
वक़्त के सितम, कम हसीं नहीं,
आज हैं यहाँ, कल कहीं नहीं,
वक़्त से परे अगर, मिल गये कहीं...!
मेरी आवाज़ ही पहचान हैं गर याद रहे...!
आज के लिए शायद इतना काफी हैं...! Thanks lofilulla.
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.org
dr.brij59@gmail.com
+91 9428312234

Oh breathe due to you I feel I'm alive..
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