DALAI LAMA says that...! - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Wednesday, September 9, 2026

DALAI LAMA says that...!

The real destroyer of our inner peace is anger.

हमारी अंदर की शांति को खत्म करने वाली असली चीज़ गुस्सा है।

एकबार समारोह में एक बच्चे ने दलाई लामा से सवाल किया। बौद्ध धर्म के पवित्र पुरुष दलाई लामा ने जो उत्तर दिया वो अक्षरश: यहाँ लिख रहा हूँ। एकबार इसे पढ़ने से दिल को सूकुन मिलेगा। अपने जीवन को परिवर्तन के राह पर चलाना आसान हो जाएगा। चलो पढ़ते हैं, लाजवाब शब्द..!


Sir, my question is how we develop inner peace ?
I think, frankly speaking, use our intelligence.Think. The real destroyer of our inner peace is anger. Anger very much related with irritation. These very much related with extreme self- Centered attitude. me, me, me that. so the method in order to reduce self-centered attitude, think of other. self, Yourself, Your entire existence depend on the rest of Your community. so you have to develop respect, of each Community respect. That reduce self-centered attitude. that reduce fear, distrust. that reduce anger. Actually compassionate mind is realistic sort of mind. Anger is unrealistic mind. so use our intelligence, pros and cons. then you get more conviction about compassion. it's really useful, including your own health. and Your longevity.
● Dalai lama.

सच कहूँ तो, हमें अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। सोचना चाहिए। हमारी अंदर की शांति को खत्म करने वाली असली चीज़ गुस्सा है। गुस्सा चिड़चिड़ेपन से बहुत जुड़ा होता है। और ये सब बहुत हद तक बहुत ज़्यादा खुद के बारे में सोचने वाले रवैये से जुड़े होते हैं - 'मैं, मैं, बस मैं'। इसलिए खुद के बारे में सोचने वाले रवैये को कम करने का तरीका है, दूसरों के बारे में सोचना। आपका अपना अस्तित्व आपके समुदाय के बाकी लोगों पर निर्भर करता है। इसलिए आपको हर समुदाय के प्रति सम्मान की भावना विकसित करनी चाहिए। इससे खुद के बारे में सोचने वाला रवैया कम होता है। इससे डर और अविश्वास कम होता है। इससे गुस्सा कम होता है। असल में, दयालु या करुणामय मन एक यथार्थवादी (हकीक़त को समझने वाला) मन होता है। गुस्सा अवास्तविक मन की उपज है। इसलिए अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, फायदे और नुकसान पर सोचें। तब आपको दयालुता के बारे में ओर ज़्यादा यकीन होगा। यह वाकई में फायदेमंद है, आपकी अपनी सेहत और लंबी उम्र के लिए भी। ● दलाई लामा

गुस्सा-चिड़चिड़ेपन से जुड़ा हैं। हर व्यक्ति के स्वभाव में जन्म से ही अच्छे-बुरे गुण स्थापित ही होते हैं। उसमें से कौन-से गुण को बढ़ाना है ? या कौन से अवगुण को बढ़ाना है, यह अपने आप पर आधारित हैं। मन में ठान ही लिया है कि हमें ठीक ढंग से जीना ही नहीं है तो बात कुछ और हैं। तब शुरु होती है मन के भीतर एक लड़ाई, अपने आप से लड़ाई...! जब पराभूत अवस्था का सामना करना पड़ता है तब गन खिन्नता से भर जाता हैं। वास्तव से दूर सब जगह जीतने की आह मन को दूषित करती रहती हैं। फिर स्वभाव में चिड़चिड़ापन छा जाता हैं। क्रोध का जन्म इसतरह होता हैं। और वही क्रोध मनुष्य के भीतर और बाहर को तोड़कर रख देता हैं। मनुष्य की सारी शक्तियाँ नष्ट हो जाती हैं।

इससे बचने के उपाय में दलाई लामा करते हैं : "आपको हर समुदाय के प्रति सम्मान की भावना विकसित करनी चाहिए। इससे खुद के बारे में सोचने वाला 'स्व-केन्द्री' रवैया कम होता जाता है। इससे डर और अविश्वास कम होते है। इससे गुस्सा-क्रोध कम होता है।" सच में मनुष्य को अपने भीतर को करूणार्द्र से भरा हुआ बनाए रखना है तो अपने आप को संतुलित रखना होगा। हमारे आसपास सौहार्द को महसूस करना हैं। और सभी लोगो का स्वीकार करना होगा। जब किसी से असूया होगी तो समझो भीतर हलचल मचना तय हैं। मनुष्य के रूप में यह समझना होगा। हमें व्यक्ति-व्यक्ति में असमानता दिखी तो समझो हमारी वैयक्तिक समर्थता भी विफल होगी। हमारे पूर्वज जो परमात्मा का रूप धारण किए हुए हैं। शायद उनको भी यह पसंद नहीं होगा। क्रोध से लडना नहीं, अपनी वृत्तियों से लड़ना हैं। इस विषय को आप अपनी तरह समझने का प्रयास करें। शायद इसके अतिरिक्त कुछ नया अनुभव में आयेगा...!
'आनन्दविश्व सहेलगाह' की विचारयात्रा में बस इतना ही।

आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli
Gujarat, INDIA
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1 comment:

  1. Yes.self centred people always feel unhappiness. good 👍 message for us.

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Thanks 👏 to read blog.I'm very grateful to YOU.

DALAI LAMA says that...!

The real destroyer of our inner peace is anger. हमारी अंदर की शांति को खत्म करने वाली असली चीज़ गुस्सा है। एकबार समारोह में एक बच्चे ने दला...

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