October 17, 2026
BY Brij Chandrarav0
Comments
"BELIEVE IN yourself when life seems impossible to move forward. Your strength is greater than you know."
"जब ज़िंदगी में आगे बढ़ना नामुमकिन लगे, तो खुद पर भरोसा रखें। आपकी ताकत आपकी सोच से कहीं ज़्यादा है।"
Definitions from Oxford Languages meaning of 'seems' is 'to give the impression of being or doing something; to appear' कुछ होने या करने की प्रतीति कराना प्रतीत होना लगाना।अंग्रेजी शब्द 'seems' का हिंदी अर्थ लगता है, प्रतीत होता है, जान पड़ता है या दिखाई देता है, ऐसा होता है।
प्रतीत होना या समझ में बैठ जाना। हो सकता है इस की जानकारी तब मिलती है; जब नामुमकिन सा माहौल खड़ा होता हैं। ज़िंदगी में आगे बढना मुश्क़िल लगता हो तब भीतरी जागरुकता ही एक मात्र मार्ग हैं। अपने खुद का भरोसा सबसे अधिक मायने रखता हैं। दुनिया में जितने भी चमत्कार हुए हैं वो ऐेसे ही प्रयत्न के बिना नहीं हुए हैं। खुद को बुलंद करने की बात में कुछ नया आकारित होता हैं। दुनिया में ऐसा भी होता है कि ताक़तवर लोग अपनी बात को रखते हैं। कोई उनका विरोध नहीं कर सकता। कभी कभार धर्म संगठन या वर्गभेद की असमानताओं का फ़ायदा उठाया जाता हैं। एवरेज लोग ये सब मान लेते हैं। भेड़-बकरियां की तरह एक के पीछे एक चलते रहते हैं। शायद उनकी बात कोई नहीं मानता तो उसको रोका जाएगा। आर्थिक-सामाजिक असमानता को मन में बैठाकर अपने नीजी स्वार्थ को पेश किया जाता है; लेकिन वो लोग एक बात भूल जाते हैं की ईश्वर ने किसी को दुर्बल बनाया ही नहीं। सबका समय आता हैं; तो उनका भी आएगा। फिर भी 'छोटा आदमी' वैसे तो मेरे लिए तो कोई छोटा-बडा इन्सान है ही नहीं। ईश्वर की हरेक कृति बेनमून हैं। बस इतनी समज विवि के कईं सवालों के उत्तर दे सकती हैं।
आज का यह वैचारिक ब्लोग उन लोगों के लिए हैं: जिसको प्रताड़ित किया जाता हैं। उनकी गति-प्रगति को रोका जाता हैं। लेकिन जब वो भीतर से जाग्रत हो जाता है; तब उसके जीवन में जो परिणाम आते हैं वो लाज़वाब होते हैं। मानो चमत्कार सा लगता हैं। बाद में जो होता हैं वो भी हैरत अंदाज घटित होता हैं। जिसे सामान्य कहा उसकी नामुमकिन प्राप्ति पर वो प्रताड़ित मानसिकता रखनेवाले अपनी गलतियों पर पछतावा किये बिना उसकी प्रसंशा पर उतर आते हैं। शायद शर्म नामकी चीज को छोडकर केवल अपने स्वार्थ को आगे करते हैं।
फिर एक बार कहता हूँ; खुद पर भरोसा करके सामने हुई बुराई को नज़र-अंदाज करो। वैयक्तिक और सामूहिक रुप से कोई कितना भी परेशान करें तुम अपने भीतर की आवाज सुनो। तुम ईश्वर की संतान हो। कोई व्यक्ति के स्वभाव में पहेले सेही कुडा जमा हो; इसके बारें में सोचना भी क्यों हैं ? एक मित्र ने मुझे एक बात बताई थी। एक संगठन के जिम्मेदार आदमी को उसने पाँच-छ बार अपने घर पर आदरपूर्वक भोजन करवाया था। उस आदमी ने एक बार मेरे मित्र को पहचाना भी नहीं। मेरे मित्र को बड़ा दुःख पहुचा। ऐसा भी होता है क्या ? इतनी कम याद्दाश्त तो नहीं हो सकती। शायद कोई बिमारी या तनाव के कारण ऐसा हो सकता हैं। अथवा तो इसे निर्लज्ज मगरूरता ही समझा जाता हैं। शायद उसे पद का अभिमान भी कह सकते हो। मेरे दोस्त का कुछ बिगड़ा नहीं यहां तक रुकता हूं।
किसीकी पसंद-नापसंद और कृपा की भी परवाह मत करो। बस चलते जाओ।अपने उपर विश्वास रखकर, संसार में ईश्वर ने दिया हुआ दमदार पाठ अदा करने में श्रद्धेय बनकर बढ़े चलो। जो तुम्हें करना हैं जो तुम्ही करोगे। तुम रुकना मत, तुम हार मानकर निराश मत होना। बस, चलते रहो; ईश्वर हाथ पकडने के लिए तैयार हैं। मंजिल तक पहुंचना आसान हैं, तुम धैर्य बनाए रखो...!
आपका Thoughtbird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Gujarat.
INDIA
drbrijeshkumar.world
dr.brij59@gmail.com
+91 9428312234
+91 7016171996