Gretitude is life..! - Dr.Brieshkumar Chandrarav

Sunday, September 27, 2026

Gretitude is life..!

A thankul heart becomes a magnet for miracles....The secret.

शुक्रगुज़ार दिल चमत्कारों के लिए एक चुंबक बन जाता है।


जीवन चमत्कारों से भरा हैं। लेकिन उसे हम आकर्षित नहीं कर पाते। कुछ ऐेसे शब्द हैं, कुछ ऐेसे वर्तन हैं, कुछ मन की अवस्थाएं हैं जो मूलभूत रुप से जीवन में चमत्कार घटित कर सकते हैं। "शुक्रगुज़ार दिल चमत्कारों के लिए एक चुंबक बन जाता है।" 'द सिक्रेट' बुक का यह प्रसिद्ध वाक्य हैं। उसे शांत मन से पढ़े। फिर शुक्रगुज़ार दिल बनाने का प्रयास करे। चलो, मैं आज इस ब्लॉग के जरिए मेरी कृतज्ञताए व्यक्त करता हूं। पहले तो आप मुझे पढ़ रहे हैं, उसके लिए आप सबका शुक्रिया अदा करता हूं। मैं जैसा भी लिख रहा हूँ आपकी एक नज़र यहाँ पड़ती हैं। उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। दूसरी बात यह भी मुझे बखूबी याद आती हैं। कईं लोग मुझे जानते होंगे लेकिन कईं अनजान दोस्त मुझे पहचानते भी नहीं होंगे। फिर भी मेरा लिखा हुआ पढ़ लेते होंगे। वो अदृश्य संबंध बनाने वाले लोगों का भी तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।


सुबह होती हैं, कोई न कोई पहली आवाज हमारे कानों में पडती हैं। हम जाग जाते हैं। कोई विचार भी हमें निंद से जगा देते हैं। और हमारी आँखें खुलती हैं। उस आवाज और विचार का शुक्रिया..! फिर सूरज की किरणों का स्पर्श होता हैं। ठंडी हवाएं हमें स्पर्श करती हैं साथ ही रंगबिरंगी पंछीओं की चहचहाहट...! हम रोमांचित हो उठते हैं। हर सुबह की उस हरेक पहलू का शुक्रिया हैं। फिर कईं प्रसाधन से हमारा कार्य शुरु होता हैं। धरती के अमृत समान पानी का स्पर्श और फिर खाने पीने की चीजें हमारे सामने आती हैं। कोई हमारे लिए नास्ता और चाय का कप लेकर खड़ा होता हैं। ऐसी कईं प्रवृत्तियां से हम स्वस्थता बनाए रखते हैं। ऐसे ही हम अपने दिन की खूबसूरत शुरुआत करते हैं। न्यूज पेपर के तरोताजा शब्दों के साथ थोड़ा-बहुत तालमेल करके नित्य के काम के लिए तैयार हो जाते हैं। यहाँ तक जो कुछ वस्तुएं हमारे सामाने आई है, उसको तैयार करने वाले हरकोई अनजान लोगो का शुक्रिया व्यक्त करता हूं।

अब शुरु होती है दिनभर की भागदौड़..! घर से निकलना और काम के स्थान पर पहुंचना। हमारे हिस्से का काम देखना। ईस पूरी कार्यशीलता में जाने-अनजाने कईं लोगो के साथ मिलना-मिलाव होता हैं। हमे कुछ लोग अच्छे लगते हैं, किसीसे मनमुटाव रहता हैं। लेकिन हमारा काम करनेवाले और न करनेवाले लोगो का भी स्वीकार करना हैं। पसंद न आनेवाले लोग भी कोई कारणवश हमारे जीवन में आते हैं। उन सबका दिल से शुक्रिया..! इस विषय पर लिखते लिखते मुझे जैन संप्रदाय की 'संवत्सरी' याद आ गई। 'मिच्छामि दुकडम' कहते हुए वो संवेदनशील लोग जाने-अनजाने में हुई गलतीओं के लिए माफी मांगते हैं। पूरे संसार में यह बात असामान्य हैं। साल का एक दिन हम ऐेसे मनाए तो बहुत अच्छी बात हैं। वैसे तो इस कृतज्ञता और दिलगीरी के भावो को भीतर में स्थापित करना हैं। पूरा जीवन शुक्रगुज़ार बना रहे ये भी दमदार जीवन के लिए आवश्यक हैं।

फिर शाम होती है, नितांत शांति से भरा माहोल बनता जाता हैं। पंछीओं की तरह हम सब अपने नीड की ओर चले जाते हैं। रात का खाना पूरे मन से आनंद पूर्वक होता हैं। सुबह और शाम के खाने में आई हरेक चीज को भी मैं याद करता हूं। इसे बनाने-पकानेवाले हाथो को भी वंदन करता हूं। अपनी भूख को शांत करनेवाली हर दृश्य-अदृश्य वस्तुएं हमारा जीवन हैं। वो हमारे शरीर को चलाते हैं, उससे हमें उर्जा मिलती हैं। शरीर की अद्भुत संरचना धड़कन को थामे रखती हैं। सांसो को बरकरार रखती हैं। हमारे शरीर का विकास और स्वास्थ्य बना रहता हैं। इनमें बसे हर निमित्त को प्रणाम हैं। भूलकर भी उससे असूया नहीं होनी चाहिए।

रात के अंधेरे में हम शांत होकर अगली सुबह के सपनों को सच करने का प्रयास करने के लिए सो जाते हैं। पूरे दिन की थकान गायब हो जाती हैं। सबकुछ भूलकर हम निंद्राधीन हो जाते हैं। फिर एक ओर सुबह होती हैं। ईस तरह हमारे जीवन का एक-एक दिन बढ़ता हैं। अच्छे बुरे कईं अनुभवो से गुजरना होता हैं। हम कुछ भूलते हैं कुछ याद रखते हुए बढ़ते रहते हैं। कभी-कभार सफलता एवं प्राप्ति का आनंद मिलता हैं। तो कहीं पर विफलता का सामना भी करना पड़ता हैं। मगर इन सभी घटनाओं का कुछ तो मतलब होगा। यह मान्यता हमारे मन में दृढ़ होनी चाहिए। अच्छे और बुरे सभी अनुभवों से हम शुक्रगुज़ार बने रहे..! शायद हमारे जीवन की कृतज्ञता राह को काफी-कुछ मज़बूती मिल सके !?!

अब सबसे बेहतर बात...! जन्म के साथ शुरु हुई पहेली सांस से लेकर अंतिम सांस तक हमारा जीवन एक नाम लेकर चलता हैं। कईं जीवन को सुंदर गति मिलती हैं। दुनिया उनसे प्रभावित होती हैं। ऐेसे कईं चरित्र विश्व में निर्मित होते रहते हैं। जो जीवन को बडी नाजुकता से जीने का प्रयास करते हैं। ऐसे अद्भुत मानव का जन्म और संवर्धन कोई अदृश्य कृपा के कारण होता हैं। विराट-विशाल ब्रह्मांड में सभी जीवो के जीवन का संतुलन बना रहता हैं। यह संतुलन बनाए रखने वाली शक्ति का तो निरंतर शुक्रगुज़ार बने रहना हैं। प्रकृति के हरेक पहलूओं की कृतज्ञता व्यक्त करते रहेना हैं। जीवन में कुछ अच्छी घटनाएं घटित हो जीसे 'द सिक्रेट' बुक 'चमत्कार' कहती हैं।

हमारे जीवन को संवारने वाली हरेक घटना और इनमें शामिल हरेक व्यक्ति के शुक्रगुज़ार बने रहेना हैं। परम शक्तिसंपन्न ईश्वर मनुष्य जीवन की बेहतरीन गति के लिए मदद करते हैं। प्रभु की अदृश्य भूमिका या परमेष्ठी की योजना निमित्त ढूंढ लेगी। ऐसे चमत्कार को जान लिया तो जीवन कृतज्ञता से संवृत हो जाएगा। हमारे जीवन में कृतज्ञता-ग्रेटिट्यूड को स्थापित करने का प्रयास दिल से करने हैं।

आपका Thoughtbird 🐣
 Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Modasa, Aravalli.
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