Dr.Brieshkumar Chandrarav

Friday, February 10, 2023

The live life.
February 10, 2023 2 Comments



 THE LIFE LIVE with Emotions.

आनंद ही जीवन का आधार हैं।
लेकिन संवेदना के बिना आनंद प्रकट हो ही नहीं सकता।


जिंदगी प्रस्तुत होने के बावजूद अप्रस्तुत भी हैं। जीवंत Live होने पर भी जिंदगी में होने वाली घटनाओं से हमसब बेखबर ही हैं। इसलिए जीवंतता को कैसे समझा जाए ?! सभी के लिए सुबह होती हैं। रात होती हैं। निश्चेतन अवस्था में भी जिंदगी चलती ही जा रही हैं। दिन-महिने-साल गुजरते हैं उनके साथ हमारी जिंदग़ी भी..!!

जीवन के बहाव में आनंद विशेषतः कारणभूत हैं। इसके बिना तो कई जिंदगियां बिना श्वास थम जाती हैं। या श्वास के साथ भी थमी हुर्ई लगती हैं। आज हम जिंदगी के आनंद क्षेत्र की बात करते हैं। मैं एक विचार रखता हूँ। मेरे साथ आप अपने भीतर सोचिए। आनंद के लिए कुदरत ने जो विश्व आकारित किया है, वो पर्याप्त हैं। हमें कुदरत में जीने की सोच कायम करनी पड़ेगी। लेकिन ये कुदरत- प्रकृति का पारस्परिक नाता मजबूताई खो रहा हैं। हम इन्सान के साथ रहते हैं। सहजीवन की परंपरागत प्रणाली ठीक-ठाक हैं क्या ? रुक्षता से हम रह पाएग़ें- जी पाएंगे क्या ?!

जीवन आनंद के मूलरंग से, मूलमंत्र से ही जीने योग्य बन सकता हैं। आनंद के मूल में संवेदना हैं Emotions हैं। प्रकृतिगत हमारे भीतर लगाव-प्रेम-सख्य संबंध स्थापित हैं। महान ईश्वर का ये unknown software  हैं। संवेदन से ही संसार हैं। संवेदन से ही कोई वस्तु या व्यक्ती में लगाव पैदा होता हैं। मनुष्य में ममत्व ऐसे जन्म लेता हैं। अब जहां ममत्व है वहां अनायास ही आनन्द प्रकट होता हैं। और ये आनन्द ही जीवन हैं। इसके बिना जिंदगी क्या हैं ? सोच रहे हैं ना ? शायद मुझसे बेहतर जवाब आपके पास भी हो सकता हैं।

हम सब ज्यादातर बौद्धिक होते जा रहे हैं। जीवन व्यवहार्यता के लिए या ज्ञान प्राप्ति के लिए सब करामाती मंजूर हो सकती हैं। लेकिन आनंदमयता के लिए खुशियों की हर क्षण को अनुभूत करने संवेदनात्मक बनना ही होगा। संवेदना से  जिंदगी जिंदा रहेगी। हमें आनंद के साथ अनुस्यूत होकर जिंदा रहना हैं। बरसों में जिंदगी नहीं, जिंदगी में बरसों का बहना।
आनंदविश्व सहेलगाह से मैं येसे कुछ जीवनविचार से भीतरी आवाज को साज देने का प्रयास करता हूँ। संवेदन से प्रेम और प्रेम से ही आनंद...!! बौद्धिकता के लिए उम्र जरुरी हैं। संवेदन के लिए बालक जैसा होना भी पर्याप्त हैं। ईस धरा पर हमसब की बहतरीन आनंद सहेलगाह में सदा-सदा साथ...!!
आपका ThoughtBird Dr.Brijeshkumar.
09428312234
Gandhinagar,Gujarat.
INDIA.
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Tuesday, February 7, 2023

Drworldpeace
February 07, 20231 Comments

 

What is the Drworldpeace..?

आनंदविश्व सहेलगाह क्या हैं ?

महान ईश्वर की अद्भुत प्राकृतिक प्रेम और एकत्व की परिकल्पना पर आधारित वैचारिक शृंखला हैं। मैं बचपन से जो कुछ महसूस कर रहा था...साथ ही अभ्यास, कुछ नयेपन से अत्यंत जिज्ञासावश सोचते रहना, कुदरत की प्राकृतिक सौंदर्य की ममता...शायद इन सबके कारण में सिखता गया। आज कुछ सोचने की कुछ लिखने की क्षमता इन्हीं तत्त्वों से मिली हैं। ये मेरी दृढ मान्यता हैं।


Drworldpeace


"आनंदविश्व सहेलगाह" ऐसे कुछ शब्द-विचार से प्रकट हुई हैं। मैं आनंदमन हूँ मुझ से कोई आनंदविश्व सहेलगाह के लिए प्रेरित कर रहा हैं। मैं निमित्त रूप मेरा प्रकृति दत्त कर्म बजा रहा हूँ। बस यही आनंद में आपका...!!

🐣ThoughtBird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
 Gandhinagar.Gujarat.
INDIA
 dr.brij59@gmail.com 
09428312234




Please read it...!

A WONDERFUL REQUEST 


Brothers and Sisters of the universe, 

"Anand Vishwa Sahelgah" is an ideological column. I Dr. Brijeshkumar request to you that we all together help the needy people in the world, regarding education and health. I want to connect with the needy through a schools and hospitals. I request to the world's richest businessmen, Sportsmen, Holywood film stars, artists and world's leaders that. I have an ideas. Make your financial contribution. Let us together incarnate the newness. Set a wonderful example of great God's principled help. An idea has to be shaped. Let us go together to give a wonderful mode to the way of Happiness...!! 

"SAHELGAH OF ANAND VISHWA."


Contact Drworldpeace.blogspot.com 

Your ThoughtBird.... Dr.Brijeshkumar Chandrarav.

Gujarat, INDIA.

+91 9428312234.

+ 91 7016171996


dr.brij59@gmail.com

drbrijeshkumar.world 


● There is a belief that something great will come out of your financial contribution. So Please, you can contact me.


 एक बहतरीन अनुरोध 


ब्रह्मांड के मेरे भाईओं और बहनों, 

आनंदविश्व सहेलगाह वैचारिक लेखमाला हैं। मैं डॉ. ब्रिजेशकुमार आपसे बिनती करता हूँ कि हम सब साथ मिलकर दुनिया के शिक्षा और आरोग्य के बारें में जरूरतमंद लोगों की मदद करें। मैं एक स्कूल और अस्पताल के माध्यम से जरूरतमंदो से जुड़ना चाहता हूँ। विश्व के धनी व्यापारी, (ऐथलेट्स) रमतावीरों, हॉलिवुड फिल्म स्टार्स एवं कलाकारों और नेताओं से अनुरोध करता हूँ कि मेरे पास विचार हैं। आप अपना आर्थिक योगदान करें। हमसब मिलकर नयेपन को अवतरित करेंगे। महान ईश्वर की प्रकृतिगत सैध्दांतिक मददगारी की अद्भुत मिसाल कायम करें। आज नहीं तो कल एक विचार को आकारित होना ही पडता हैं। "आनंदविश्व की सहेलगाह" को बहतरीन मोड देने हम साथ चलें।

संपर्क करें Drworldpeace.blogspot.com 

आपका विचारपंखी...डॉ.ब्रजेशकुमार चंद्रराव 

गुजरात,भारत 

+91 9428312234.

+91 7016171996

dr.brij59@gmail.com

drbrijeshkumar.org 


■ आपके आर्थिक योगदान से कुछ बेहतरीन आकारित होगा, ऐसी श्रद्धा हैं। आप मेरा संपर्क कर सकते हैं।





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Monday, February 6, 2023

The Dreamers.
February 06, 2023 2 Comments

 The Dreamers can change the world.

I'm definitely believe and you ??

The Dreamers

आशाएं-उम्मीदें-सपनें- पागलपन ये सब एक ही दिशा में दौडने की बात करते हैं। कितना बडा विश्व और कितने सारे लोग ?!! सबके अलग सपनें और सबकी अपनी दौड, सबका अपना-अपना पागलपन !! वैसे तो पागलपन एक बिमारी कहलाती हैं। फिर भी पागलपन से ही क्रान्तियाँ हुई हैं।

महान ईश्वर की अद्भुत योजना में मनुष्य के मन-मस्तिष्क के बारें में  No Repeat Theory कायम हैं। तुंडे तुंडे मतिर्भिन्न: यानि सब अलग है। Men are unique. समय के कदमों में नित नयापन जंकृत होता रहा हैं। अचंभितता से भरी सृष्टि में हम सब इस हेरतअंदाजी से चकित हैं।

इन्हीं पृथ्वी पर कोई नए सपनें देखता हैं। उसे पूरा करने का अथक प्रयास करता हैं। किसीके सपनों की उडान त्वरा से गति पकडती हैं। कोई सपनों के पीछे बहुत भागता हैं। आखिर वो सच तो होते ही हैं। ये सपनों वाली बात सबसे टेढी होती हैं। दुनिया को समझने में, इस सृष्टि की व्यापकता को पहचानने में हम अच्छी तरह से सो नहीं पाते। और हमें अपने सपनों से दूर होना पडता हैं। वैसे तो सपनें पिछा न छोडने वाली अमीरात हैं। निंद में ओर जागतिक स्थिति में भी वो हमारे साथ ही रहते हैं। एक बार सपनें को बारीकी से संवारना होगा। ममत्व की पराकाष्ठा से संभालना होगा। व्यक्तिगत रूप से कोई लाभ न होने के बावजूद सपनें को सजाना और सहज कर्म समज कर सृष्टि में समर्पित करना होगा।
इस दुनिया में कई सपनों के सौदागर आए हैं, पागलपन से जीवनभर सपनों को सच करने की चाहत रखकर दमदार जी कर चले गए। आज भी उनके सपनों की खैरात से हम खुश हैं।

आनंदविश्व सहेलगाह ऐसे सपनों में जीने वाले लोगों से संवितरित होना चाहता हैं। विचार के बीज से संसार को नई अवधारणा दे कर, उस दिशा में चलने वाले लोंगों के काफिले को आनंद का अमर्याद खजाना मिले। वो आनंदमन की अविस्मरणीय पलों के साक्षी बनते रहे। महान ईश्वर क्या यहीं चाहते होंगे क्या ? 
बिल्कुल मेरा विश्वास बरकरार हैं...क्योंकि ईश्वर ही प्रेमस्रष्टा हैं।
Your ThoughtBird Dr.Brijeshkumar
Gandhinagar, Gujarat.
INDIA 09428312234.
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Tuesday, January 31, 2023

The real HERO
January 31, 2023 5 Comments

 The hero of human being Heart.

🩶Truth 💙 Nonviolence 💜 LOVE.



अद्भूत-अविस्मरणीय बापू। व्यक्ति से विराट की सहेलगाह यानि बापू। सत्य से अहिंसा तक बापू। मानवमन के श्रद्धेय बापू और सबको प्रेम करने वाले बापू। बापू के लिए कुछ भी लिखने वाला कभी भी बापू की विराट विशालतम प्रतिभा को वर्णित नहीं कर सकता। सब अच्छे प्रयास से बापू की बात रखते हैं, आज में भी थोड़ा प्रयास करता हूँ। मेरे लिखने से बापू को कोई भी फायदा नहीं होगा लेकिन मेरे जैसे कईयों की वाह-वाही हो सकती हैं। बापू आज भी हमें विकसित कर रहें हैं। ये उनका सदैव आशीर्वाद....!!

The bapu

जीवन के संघर्षो में से ही आदमी अपने जीवन की दिशा तय करता हैं। अथवा अदृश्य ईश्वर की वैशिष्ट्य प्रकटीकरण की योजना से दुनिया में कोई इन्सान अकल्पनीय जीवन जीता हैं। संसार में कुछ न कुछ अचंभित होता रहता हैं। बापू विश्व की श्रेष्ठतम घटनाओं में से एक हैं। बापू एक युग की तरह हैं। आज भी वो अपनी द्रढता से प्रयोगशीलता से मानव मन की सच्ची परिचितता से हमारें ह्रदय में कायम स्थान बनाए हुए हैं।

बापू मात्र स्वतंत्रता के राहबर नहीं रहे हैं। बापू व्यक्ति जीवन के परिशोधन के राहबर हैं। देश को गुलामी से अवगत कराना सहज था। लेकिन मानसिक गुलामी से अवगत कराना दुष्कर था। व्यक्ति को व्यक्ति की मूल्य धारणा से परिचित करवाना कठिन था। मुझे अपने ही कार्य से प्रेम करवाना कठिन कार्य था। दूसरों लिए मेरे हृदय में करुणा स्थापित करना सबसे दुष्कर कर्म था। बापू ने मानव जीवन के सभी पहलूओं पर अपना सहज मत दीया हैं। लेकिन वो मत सहज न होकर सक्षम बनता गया हैं।

आज भी आल्बट आइन्स्टाइन के शब्द प्रस्तुत हैं, Generation to come will scarce believe that such a one as this ever in flesh and blood walked upon this earth. आनेवाली पीढ़ी शायद मानने को तैयार न होगी की येसी कोई मानवीय शख्सियत इस पृथ्वी पर जी चूकी होगी !!

बापू असामान्य हैं, असाधारण हैं। बापू इन्सान के रुप में मानव समाज के लिए आनेवाली  सदियों के संदेशवाहक व मार्गदर्शक हैं। जीवनरीति के उद्घोषक बापू...!! प्राण- प्रकृति और प्रवृति की संवेदनशीलता हैं बापू...!!

आनंदविश्व सहेलगाह का बहतरीन पक्षधर बापू के जीवन मूल्य भी हैं। जो सत्य है वो ही सनातन है, शाश्वत भी...!! विश्व के बापू सत्यमूर्ति हैं इसलिए राहबर भी ओर हमसफ़र भी हैं। चलें बापू के वैचारिक मार्ग पर। भरपूर जीये बापू की सम्यक जीवनद्रष्टि को अपना कर।


🐣ThoughtBird🐥
 Dr.Brijeshkumar chandrarav 
Gandhinagar, Gujarat. 
INDIA
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dr.dr.brij59@gmail.com 
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Friday, January 27, 2023

THE  PANCHTATVA.
January 27, 2023 3 Comments

 The power of Life...Growing and Glowing with PANCHTATVA.

पंचमहाभूत- पंचतत्व से हम संवृत-संतृप्त हैं। 

The power of Life

महान ईश्वर ने पंचतत्वों का विश्व आकारित किया हैं। इन तत्वों की मौजूदगी जीव-जगत की निर्मिति का कारण बनती हैं। मनुष्य जीवन इसी पारंपरिक व पारस्परिक ईश्वरीय संभावनाओं से घटित हुआ हैं। ईश्वर की श्रेष्ठतम कलाकृति  होने का हम गौरव करते हैं। बुद्धि और भाषिक वैशिष्ट्य प्राप्त करके हम सभी जीवों से बेहतर सबसे उपर हो गए।
सारी सृष्टि का नियमन हमारे हाथ में नहीं है। फिर भी हम ही सब चला रहे हैं ऐसे गुरूर के साथ सारी सृष्टि का संचालन करने प्रतिबद्ध भी हो रहे हैं। सबसे बेहतर बनने  व्यक्ति-समूह-धर्म या राष्ट्र की होड लगी हैं। ऐसी कुछ बात है ना ? बेहतर वो हैं जो सबका भला सोचे और करे।

ईश्वर के पंचमहाभूतो में आकाश मूलभूत तत्व हैं। वह मूलभूत तत्व, जिसके ऊपर बाकी के चार तत्व अपना खेल खेलते हैं। सद्गुरु का ये विचार हमें काफी कुछ गहराईयों में ले जाता हैं। परम- सर्वोच्च- अनंत आकाश से अपनी सीमाओं से परे जाने की क्षमताएं प्राप्त करे। आकाश असीमताओं से समृद्ध है। आकाश  हरदम हमारा बोध करने मौजूद हैं। विशालतम संभावनाए कैसे संभावित हो इसका अहर्निश ज्ञान-बोध करने आकाश हमें संवितरित है...अनंत को धारण किए !!

पंचतत्व से बना हमारा शरीर भी इस पंचतत्वों की असीमित शक्तियों से अवश्य संबल बन सकता हैं। लेकिन पंचतत्वों का पारस्परिक मेल हमें सिखना होगा। पारस्परिक अवलंबन और एक दूसरें का साक्ष नियमन सहजता से अनुभूत करना होगा। ये संयोग नहीं है,दिव्यता का संबंध है। ये तत्वों के बीच पंचमप्रेम, पंचमानुराग ओर पंचमसख्य भी ईश्वरीय ब्रह्माण्ड का अविस्मरणीय सृजन हैं।

आनंदविश्व सहेलगाह का मार्ग प्रशस्त करने हेतु संबलता प्राप्त करने पंचमहाभूतो के आधिन अपना जीवन विकसित करना होगा। ईश्वर इन्ही को आधार बनाकर हमें शक्ति प्रदान करते होंगे क्या ?! शायद ?!
🌍
छोटे-से विचार के साथ मेरी ये प्रस्तुती भी शायद आपको पसंद आए। हमें शामिल होना है अपने भीतर !! अपनी ही जिवंतता के साथ। यही संदेश पंचतत्व का हैं और जीवंतता का फैलाव भी..!!  खुशीओं का सैलाब भी !! आपका ThoughtBird Dr.Brijeshkumar
Gandhinagar Gujarat, INDIA
09428312234.

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Tuesday, January 24, 2023

Thinks power...!!
January 24, 20230 Comments

 The man is Thinker...who is never without think ? !

विचार के बग़ैर कोई कैसे जी सकता हैं ?

Man


महान ईश्वर ने हमें विचार की येसी बख़्शीश देदी हैं कि हममें दुनिया को अचंभित करने का सामर्थ्य हैं। विश्व का या मानवसृष्टि का कल्याणक विचार हमारे भीतर पलता है तो कभी न कभी वो सादृश्य रूपांतरण की गति को प्राप्त करेगा ही। और आकारित भी होगा। सपनों को साकार करने विचार की ही तो आवश्यकता हैं !!

आज जो जगत हम अनुभूत कर रहे हैं, वो किसी न किसी विचार की ही फलश्रृति की कलाकृति हैं। मनुष्य सहजता से विश्व को नयापन दे कर सँवार रहा हैं। युगों से ये कार्य हो रहा हैं। समय की मर्यादाओं को तोड़कर अजीब किस्म की शोध-अनुसंधान की रफ्तार कभी कम नहीं हुई। इन सब के पीछे ईश्वर की विचार कर्मकता गतिमान हो कर आवृत्त हैं। हवा की तरह, प्रकाश के किरनों की तरह, आवाज की सरसराहट की तरह अदृश्य होकर भी हमारे भीतर कुछ करने का होंसला बनकर उभर रही हैं।

मनुष्य के रुप में एकमात्र विचार के ही जरिए हमने भाषा-भूषा,रहन- सहन, जीवन के तौर तरीके कहो की सुसंस्कृत जीवन पद्धति निर्माण की। कुछ भौतिक कुछ आध्यात्मिक पहलूओं की नित नवीनता कायम की हैं। भौगोलिक -अंतरिक्ष या वैज्ञानिक समृद्धीयाँ से हम संवृत-संतृप्त व संबल बने हुए हैं। सारा विश्व विचारतत्व के मूलभूत तत्व से ही सत्वशील गहराईयों को धारण कर पाया हैं। आनंद है ईसका...awesome !!

आनंदविश्व सहेलगाह Blog येसे ही अद्भुत विचार के बल पर उत्साह के कदम भरने को उत्सुक हैं। हमें भी दुनिया को कुछ देना होगा। ये हमारा ईश्वरीय दायित्व हैं। जीवन जीवित तो हैं। उसे जीवंत बनाना हैं। एक विचार बीज मुझे भी इस धरती पे उगाना हैं। दूसरें का भला सबका भला बने। मैं सबका सब मेरे बनें। एक येसा विश्व जो निश्चिंत हो कर जीये आनंद की अमर्यादित संभावनाओं में जीये। तो शुरू करें एक आनंद मार्ग की यात्रा विचार के जरीए...!!
Your ThoughtBird Dr.Brijeshkumar.
Mo.09428312234
Gujarat, INDIA. 
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Friday, January 20, 2023

STRUGGLE AND LOVE IS EQUAL TO KRISHNA...!!
January 20, 20231 Comments

 Who is KRISHNA.

  Extreme struggle and Responsible action.

 प्रेममय कृष्ण..संघर्ष का संगीत उत्कृष्ट जीवन-दर्शन !!
 

महान ईश्वर की अदृश्य होकर भी सृष्टि पर नये जीव विकसित करने की अविश्रान्त परंपरा लाजवाब रही हैं। जन्म और मृत्यु के अदृश्य भेद आज तक हम समज नहीं पाए। कई विलक्षण-विचक्षण जीव इस सृष्टि में अवतरित होते रहें हैं। कालक्रमिक सृष्टि का मार्गदर्शन होता रहा हैं। समय समय पर कोई  युगप्रवर्तक युगद्रष्टा मानवसृष्टि का उच्चतम मार्गदर्शन करता हैं। विश्व में कई घटनाएं होती रही हैं...इतिहास साक्ष्य हकीकतों से भरा पडा हैं।

पांच हजार वर्ष से भी पहले भारतवर्ष में जगद्गुरू कृष्ण का अवतरण हुआ। मानव सहज जीवनरीति और जन्म परंपरा का एक घटक बनकर कृष्ण का जन्म हुआ। जन्म से ही संघर्ष से मजबूत नाता बनाकर भी बंसी बजाता रहा कृष्ण !! जन्म से ही प्राकृतिक रूप से सभी जीव को माँ मिलती हैं। ईश्वर की अदृश्य प्रेम परंपरा का दृश्य अस्तित्व माँ हैं। कृष्ण को उससे दूर होना पड़ा। नई जगह, नया वातावरण और अनजाने लोंगो से कृष्ण ने सहज अद्भुत नाता कायम कर लिया। कृष्ण के जीवन में एक राधा आई...प्रेम की जीवंत मूर्ति राधा। कृष्ण- राधा का पारस्परिक प्रेम सृष्टि का उच्चतम शिखर हैं। राधा से सुबह राधा से शाम फिर भी कृष्णा के जीवन में से राधा अदृश्य हो गई। पारिवारिक संघर्ष का तो समंदर कृष्ण ने हसते हसते पार कर लिया। बंसी की सूरावालियों में कृष्ण की पीडा के पडघम शांत होते रहें। कृष्ण ने जीवन का संगीत बजाया हैं। जीवन का आनंद बंसी के जरिए स्पंदित किया हैं। आज भी कृष्ण की अप्रतिम भक्ति से वो सूर महसूस कीये जा सकते हैं। कृष्ण अनुभूत जीवन का आधार हैं।

मानवमन और प्रकृति का सौंदर्य बोध कृष्णा ने बडी सतर्कता से किया हैं। ज्ञान-कर्म और जीवन की अप्रतिम फिलसूफी कृष्ण ने सिखाई हैं। निमित्त भाव और समपर्ण की अद्भुत मूर्ति कृष्ण हैं। जहाँ खडे हैं वहाँ सौंदर्य स्थापित करना वो ही  कृष्ण जीवनामृत हैं। अप्रत्यक्ष हो कर भी आज कृष्णा की प्रेममयता जीवंत हैं। आज भी कृष्ण प्रेममय ह्रदय का स्वामी हैं। अकल्प आकर्षण का बीज कृष्ण ही हैं।

आनंदविश्व सहेलगाह में कृष्ण का जीवन दर्शनशास्त्र आज भी प्रस्तुत रहेगा। कृष्ण की हरेक हरक़त में जीवन की मस्ती हैं। उनके संगीत में नर्तन में भी अलौकिक आकर्षक हैं। युद्ध में भी वो बुद्ध हैं, संबंध में वो शुद्ध हैं, प्रेम में वो नितान्त समर्पण से प्रतिबद्ध हैं। अपौरुषेय कृष्ण समस्या से परे आनंद पुरूष है। हमारी जीवनयात्रा  कृष्ण की आनंदानुभूति से संबल बने यही शुभसंकल्पना के साथ आपका सहपंथी...!!
ThoughtBird Dr.Brijeshkumar.💕
Gujarat, INDIA
09428312234.

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રજતમિલન...મારા મોડાસા નગર નિવાસની વર્ષગાંઠનો અવસર...!

મોડાસા નગર નિવાસની વર્ષગાંઠ...! 'રજતમિલન' એક ગામડાનો માણસ પચ્ચીસ વરસ પહેલાં,  '૧ મે ના 'ગુજરાત રાજ્યના સ્થાપના દિવસે' ...

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