Dr.Brieshkumar Chandrarav

Tuesday, January 17, 2023

TRYING has a Good possibility for World.
January 17, 20231 Comments

 Only Trying is in our Hands.

प्रयास ही हमारे हाथ में हैं।

महान ईश्वर ने अपनी दुनिया का बखूबी अपनी ही मर्जी के मुताबिक सृजन किया हैं। मनुष्य का सृजन करने के बाद शायद उनकी खुशी का ठिकाना न रहा होगा। मन-बुद्धि दे कर ईश्वर ने सोच ही लिया होगा मैंने इन्सान सर्वशक्तिमान बना दिया हैं। संसार में सुंदरता निर्माण करने वो अपनी सारी शक्ति लगा देगा। स्वार्थ से परे प्रेम-आनन्द-समर्पण-सहज-सरल व्यवहार से मुझे भी आनंदित करता रहेगा। प्रकृति से अनुराग और सामंजस्य स्थापित करके पारस्परिक अवलंबन में अपनी खुशहाल जिंदगी जियेंगा।
           लेकिन कुछ अप्राकृतिक बढ़ता रहा.. अमानवीय आकारित होता रहा और हम वैयक्तिक-सामूहिक-संस्थानिक-प्रान्तिक-भाषिक न जाने कितने भेद और अलगाव में फंसते गए। ईश्वर की ही सृष्टि की अधिकारिता में कितने युद्ध आपस में करते रहेंगे ?! ईसमें मनुष्य के रुप में मेरी कुछ छोटी सी भी जिम्मेदारी होगी क्या ?!  हम अपने कितने स्वार्थ पूर्ण करेंगे !! आप सुकुन से बैठे हो तब सोचना सबसे बेहतरीन विचार जरुर आएगा। और न आए तो आनंद विश्व सहेलगाह को पढ़ना बंध.. लेकिन मेरा विश्वास है जब आत्मिक आवाज सुनाई देगी तो बहतरीन के सिवा कुछ न होगा।

महान ईश्वर ने हमें कर्म दिया हैं। जीवन के लिए प्रयास दिये हैं। उसके जरिए एक सोच आकारित होती हैं। उससे जुड़ाव महसूस होता हैं। कारवां येसे ही विकसित हुआ। हम एकत्व के विचार से विचलित हुए तभी तो कारवों में बंटते गए। और आज कितनी भिन्नार्थकता से संवृत हो गए ? या समृद्ध ?

आनंदविश्व की वैचारिक सहेलगाह में हम कुछ पल विश्व के शांतिपूर्ण पहलू के बारें में थोड़ा-बहुत सोच-विचार करें। हमारा बीज रूप छोटा-सा प्रयास भी कुछ अंतरंग निर्माण करेगा। मैं तो इस बात पर दृढ़संकल्पित हूं। धरातल पर ऐसी कोई असंभव समस्या है ही नहीं। कमी कुछ प्रयास की हैं। ईश्वर हमारें प्रयास को कैसा नाम देंगे कौन-सा मोड देंगे मुझे पता नहीं।

ईश्वर ने हमे सोचने का कार्य करने का अद्भुत शस्त्र और शास्त्र दिया हैं। ईसको हम सामर्थ्य कहे तो भी गलत न होगा। Let's we start do good be good, Think and action.
एक छोटे-से प्रयास में आपका डॉ.ब्रजेशकुमार
Gujarat, INDIA 09428312234.

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Friday, January 13, 2023

Festivals Happiness
January 13, 20230 Comments

 Happiness with KITES.

उमंग और उत्साह से भरा त्योहार.. उत्तरायन..!!


मनुष्य सहज ही आनंद प्रिय हैं। ये हमारी मूलभूत सोच हैं। सारे विश्व में मनुष्य उत्सव इसीलिये मना रहे हैं। ईस धरातल पर विभिन्न संस्कृतियाँ विद्यमान हैं। सभी संस्कृति की मूलभूत विरासत उत्सव हैं। उत्सव आनंद-उमंग-उत्साह को प्रेरित करता हैं। भारतभूमि तो उत्सवों की रसखान हैं। यहां हरपल उत्सव हैं। यानि की हमें उत्सव से जीने के अंदाज में कुछ नवीनतम बदलाव का अहसास मिलता हैं। ये संपूर्ण सर्वर्विदित बात हैं।

मकरसंक्रांति- उत्तरायन-पतंगोत्सव जो मन में आए कहो। मुझे बात करनी है सिर्फ पतंग की..!! रंगबिरंग, छोटे-बडे,आकार वैविध्य से भरे। कागज और बांस के मेल से बनी पतंगे। पतली सी डोर से बंधी पतंगे। आसमान को छूने का प्रयास करती पतंगे। उडाने वाले और देखने वाले दोनों को पागल करती पतंगे। कोई बीच में ही कट जाती, कुछ दूर चली जाती पतंगे। कोई छटपटाहट भरें कोई धीर गंभीर बनके टहलती हुई पतंगे। कितनी सूनाए ईस छोटे से पतंग के बारें में...!!

हम सब एक छोटी पतंग ही हैं। हमें भी उडना हैं, बहुतदूर तक उड़ान भरनी हैं। खुले आसमान में हमें भी अपने करतब दिखाते हुए सबको आनंदित हुआ देखना हैं। किसी के चेहरे पर आनंद की फुहार देखना भी ईश्वरीय स्पर्श महसूस करने जैसा हैं।
महान ईश्वर सारे विश्व के मनुष्यों को अपनी मन बुद्धि के मुताबिक कुछ आनंद क्षेत्र खोजने और जीने के अवसर प्रदान करते हैं। विश्व में उत्सवों का अवतरण इसी आनंद प्राप्ति की खोज के कारण हुआ हैं। इश्वर ने मनुष्य के निर्मित नैमित्ति से ही उत्सव निर्माण किए हैं।

आनंदविश्व की सहेलगाह में ये उत्सव हमें जोश देंगे। नया उमंग और उत्साह देंगे। " यू हीं तो उत्सव हैं तो उत्साह है " जीवन को बेहतरीन पतंग सा जीना हैं। बंधन होने के बावजूद थोडी सी उड़ान का आनंद लेना हैं। पतंग सी रंगत को धारण करके...विशाल आकाश में...कई रंगभरें दोस्तों के साथ बस मनभर के उड़ान के मजे लेने हैं...आखिर मैं और आप भी सम्मिलित हैं..!! ईश्वरीय संभावनाए भरे विश्व में !! 

आनंदविश्व सहेलगाह के वैचारिक कदम उठाकर आपके साथ Your ThoughtBird डॉ.ब्रजेशकुमार
09428312234
Gandhinagar,Gujarat
INDIA.

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Thursday, January 12, 2023

ज्ञान का दिग्विजय स्वामी विवेकानंदजी...!!
January 12, 20230 Comments

१२मी जनवरी १८६३ मकरसक्रान्ती एक अनोखे महामानव का अवतरण उत्सव..!!                     


विश्व के सत्वशील लोगो के सामने दो ही शब्द Brothers and sisters का  संबोधन करके और अपने हृदय के उत्कृष्ठ भावों को प्रकट करके कुछ ही पल में अपनापन  स्थापित कर देने की जादुई शक्ति का संचार करने वाले स्वामी विवेकानंद...!!

Svamiji

आज उनका जन्मदिन हैं। केवल ३९ वर्ष की आयु में  ४ जुलाई १९०२ में इस संसार को अलविदा कर दिया। स्वामी विवेकानंद यानी ज्ञान- उपासना का उच्चतम शिखर। विश्व के कल्याण हेतु एवं मानवता को एक नई पहचान देने को धरती पर आया हुआ एक अलौकिक महामानव स्वामीजी। बंगाल की सत्वशील एवं सत्यापन की भूमि का अनोखा इन्सान स्वामीजी।

भारतवर्ष की आध्यात्मिक चेतना को महसूस करके विश्व को मार्गदर्शन करने का अद्भुत कर्म स्वामीजी ने बजाया हैं। अपनी मेधाशक्ति और कल्याणक विचार दृष्टि से वो आज भी हमारें बीच विचारपुरुष के रूप में जीवित हैं। विचार नाशवंत नहीं हैं। विचार अक्षुण्ण हैं। विचार सत्वशीलता को स्थापित करता हैं। विचार की वर्यता-श्रेष्ठता मानव सृष्टि को प्रेममय बनाती है। ईश्वर स्वामी विवेकानंद जैसे आदर्श हमारे बीच भेजकर उनकी ही दृढता कायम करते हैं।

विश्व में स्वामी विवेकानंदजी के बारें में काफी कुछ लिखा गया हैं। विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी द्वारा आज भी स्वामीजी के विचारोंको समाज में स्थापित करने का प्रयास हो रहा हैं। स्वामीजी का अद्भुत व्यक्तित्व आज भी हमें उनके विचारों के जरीए अचंभित कर रहा हैं। महान ईश्वर समय समय पर ऐसे मानवों का सृजन करके मानवसृष्टि को मार्गदर्शन करतें हैं। आनंद विश्व की सहेलगाह के लिए स्वामी विवेकानंद जैसे कई मनीषीओं के विचारतत्व का स्वीकार करना चाहिए। बौद्धिक आनंद की वैचारिक सत्वशील गहराई स्वामी विवेकानंद जी के पथदर्शक विचारों में हैं।

जीवन की उडान को ध्येय एवं निश्चित लक्ष्य हासिल करने की मानव सहज कोशिश में ईश्वरीय ज्ञान रूप स्वामी विवेकानंद से विचारमैत्री संभव हैं क्या ?? हम सब संकल्प करे, थोड़ा-बहुत प्रयास करे की वर्षभर स्वामीजी के विचारमित्र बनकर कुछ पढना हैं।

Happy Birthday...awesome GYAN PURUSH.

Your ThoughtBird 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav
Gandhinagar, Gujarat.
India
dr.brij59@gmail.com 
09428312234



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Monday, January 9, 2023

Way of Happiness !!
January 09, 20230 Comments

 आनंद प्राप्त करने का आसान तरीक़ा कुछ न कुछ देने की हरकत में हैं।

आनंद सहज हैं, हमें सहज बनना होगा।     

  Let's we start to walk this way.


                   
कुदरत की बनाई हरेक चीज कुछ न कुछ देने की प्राकृतिक गुणधर्मों से संवृत हैं। एक छोटा सा पौधा भी खूबसूरत पुष्प के साथ हमें खुशबु की फुहार देता हैं। आपको ऐसे कई उदाहरणों की याद के लिए मैं आनंदित हुआ। ईन्सान के रुप में ये सोचना सहज हैं। इसलिए मैं यादों का मेला आपके मन-मस्तिष्क में उमड उमड कर उभरें बस येसे शब्द-विचार लिख रहा हूँ।

सबको आनंद पसंद हैं। हमारी सेहत से लेकर हमारी वैचारिक उडान भी आनंद क्षेत्र से निकलती हैं। ये जो आनंद हैं न,वो ही मनुष्य के रूप में हमें सबसे बेहतर साबित कर सकता हैं। विश्व में कई सफल व्यक्तिओं की जीवनरीति में आनंद की अहमियत सबसे ज्यादा हैं। ओर ये आनंद दूसरों का विचार करने में, किसीको कुछ न कुछ देनें में निहित हैं। हमारे पास जो कुछ हैं...शब्द हैं, विचार हैं, धन-दौलत हैं या खुशी के पल हैं। दूसरें के चेहरे पर मुस्कान दे सके येसा कुछ भी हमारे आनंद प्राकट्य का अवसर हैं।

एक बच्चा सहज हैं। क्यों सहज हैं ? क्योंकि उसे दुनिया से सीखना हैं। नये वातावरण में अपनी जिज्ञासा को संतुष्ट करना हैं। बच्चा सभी को हसतें हुए आशावंत बनकर देखता हैं। "वो मुझे देखकर खुश होता हैं इसलिए मुझे भी हंसना है।" ऐसी कुछ कल्पनाएँ  बच्चें के अंतरंग दिमाग में होगी क्या ?? हम तो अब बच्चें नहीं रहे।

आनंदविश्व सहेलगाह को बचपना चाहिए। हमारी बुद्धि भले बढ गई हो। वैचारिक मतभेद के जमेले से गिरें हुए हो। लेकिन आनन्द प्राप्त करना है तो सहजता से बच्चा बनकर कुछ पल बचपने मे बिताने ही पड़ेगें। ठीक हैं ना ?

Your small ThoughtBird is small child till this moment.
Dr.Brijeshkumar.
09428312234 Gujarat, India.

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Friday, January 6, 2023

Extreme TRUST.
January 06, 20231 Comments
What is the extreme TRUST. 
श्रद्धा की पराकाष्ठा क्या होती हैं ?!
 
                                             

श्रद्धा और विश्वास के कारणवश जगत विद्यमान हैं। हम सब को ये विश्वास ही संजोए रखता हैं। सुबह होगी, रात होगी, कल का खुशहाल दिन आयेगा। महिना बरस- साल आएगा। मैं ये करुंगा, मेरी यह योजना हैं। मैं ये बनना चाहता हूं। ये सब विश्वास से झुडी बातें हैं। कोई भरोसा हमारे मन को थामें हुए हमें सृष्टि में जीने के करतब करवा रहा हैं। कल्पनातीत जगत में हम बहें जा रहे हैं। कोई अकल्पनीय मार्ग के यात्रीगण के रूप में बस चलना हैं।

ईस धरातल पर ईश्वर भी किसी न किसी को मिले हैं। भारतवर्ष तो ऐसे कई उदाहरणों से समृद्ध है। कहीं एकनाथ को श्रीखंड्या के रुप में, कहीं नाम्बी को गणेश के रूप में, कहीं नृसिंह को कृष्ण के रूप में, प्रह्लाद को विष्णु के रूप में या शबरीमाँ को राम के रूप में ईश्वर की दृश्य अनुभूति हुई हैं। ऐसी तो कई घटनाएँ भारतवर्ष की आध्यात्मिक धरोहर का साक्षत्व बयां करती हैं। मनुष्य के रूप में हमें अपना भी अनुभूत विश्व खडा करना हैं। इतिहास के पन्नों में हमारी साक्ष्य अनुभूति का कोई मोल हो न हो। ईश्वर की आकारित योजनाओं मे मैं भी सम्मिलित हूँ। जन्मदत्त मेरा भी छोटा सा आनंद क्षेत्र हैं। मेरा भी अतूट-असीम श्रद्धा बल हैं। This is our extreme TRUST. 

विश्वमें व्यक्ति साथ-सहयोग दे सकता हैं। कभी प्रेम और सहानुभूति भी..!! लेकिन मन की अलौकिक आनंद अनुभूति ईश्वर से ही मिलती हैं। उसकी योजना में छल-कपट नहीं। सबके लिए समान और सबको अपना ही लगने वाला प्रेमबीज हैं। हम सबने सूना है ईश्वर ही सामान्य को असामान्य बना सकता हैं। सही भी हैं।  लेकिन हम ईश्वर का ही सृजन है इसलिए सामान्य तो है ही नहीं।

उसी प्रेमबीज से हम  संवृत-संतृप्त हैं। ईश्वर की अमाप-असीम शक्तिसंपन्नता हमें ह्रदय के उच्चतम भावों से भर देती है। हमे बस अनुसरण का मार्ग चयनित करना है। बाकी सब उनको ही सौपकर निस्संदेह होकर निश्चिंतता से आनंदविश्व सहेलगाह को बहतरीन बनाना है।
आनंदविश्व विश्व की सहेलगाह तो एक छोटा-सा विचार हैं। हम अपना खुद का आनंदविश्व खङा कर पाए ओर जीवन का ईश्वरीय आनंद पाए..!! यही शुभ कामनाएँ मेरी..!!

 मैं तो आनंदविश्व सहेलगाह की इस वैचारिक यात्रा का नैमित्तिक कर्म बजा रहा हूं। Voice of soul. कुछ क्षण के लिए आनंदमार्ग पर वैचारिक सहेलगाह है मेरी...!!  💕🚶
Your ThoughtBird Dr.Brijeshkumar. 
Gujarat,INDIA 
09428312234
 






                         












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Tuesday, January 3, 2023

 EARTHMOTHER.
January 03, 20230 Comments
The Earth is symbol of Reciprocable  LOVE. 
सारे संसार को धारण करने वाली हमारी पृथ्वी....!

ईश्वर के द्वारा संजोए हुए हरेक तंतुओं से परीवृत्त हमारी पृथ्वी। अधध जलराशी, जंगल-जमीन और मानव-पशु-पंखी एवं असंख्य जीव-जंतुओं के विस्मय से भरी हमारी प्यारी हमें संवर्धित करने वाली पृथ्वी माँ की सहस्त्र कोटी वंदना ।

विश्व की अद्भुत जीवसृष्टी को लाखों करोडों सालों से धारण करके उसका अविश्रान्त पालन कर रही हैं पृथ्वी माँ। कोई अकल्पनीय घटना से, सूर्य का एक धधकता अंश अवकाश में घूमता रहा। कई बरसों तक ये विशाल आकार नियंता की ख्वाहिश के मुताबिक अथवा कोई अनंत योजना के तहत घूमते घूमते निश्चित आकारित होता हैं। इस तरह हमारी धरित्री का अवतरण हुआ I इस तरह की भौगोलिक बातों से हम सभी अवगत हैं। सतत घूमने से या कोई विशिष्ट योजना के कारण यहाँ ज़ीवसृष्टि का वातावरण निर्मित हुआ।

ईश्वर के आनंदविश्व का निर्माण हुआ..!! उसकी तरासी हुई हर एक चीज अपना अस्तित्व बनाती गई। चेतन अचेतन सभी चीजों ने अपना कर्तृत्व कायम करना शुरू किया। पारस्परिक अवलंबन ये सृष्टि का प्राण तत्व हैं। और ईश्वर का पसंदीदा  आकलन भी। अदृश्य होने के बावजूद ईश्वर ने सभी तत्वों का संमिलित सम्मिश्रण नियमित रूप से स्थापित कर दिया हैं। इसके ताग़ को समज पाने के हमारे प्रयास आज भी पूर्ण रूप से असमर्थ रहें हैं। मनुष्य के रूप में हमने जो कुछ प्राप्त कीया है उसका आनन्द ओर अचरज !!  यही हमारी खोज संपदा !!  ज्ञान संपदा !!

 ज्ञान-विज्ञान एवं योग-आध्यात्म की हमारी मानव सहज प्रकृति रही हैं। विश्व के सभी देशों के मानवों ने यहीं सिद्धांत के तहत ही अपनी जीवनरीति को कायम किया हैं।विश्व में जो वैविध्य आकारीत हुआ ओर हो रहा है ये इसी नियंत्रित परिभाषा के कारणवश है।
असंख्य आकाशगंगाओ में हमारी तो एक मात्र पृथ्वी हैं। जहाँ हमारा जीवन हैं। जहाँ हमारे श्वास चल रहे है। जहाँ संबंधों का जगत हैं। रात है दिन है। उम्मीदों के आशियाने सजते हैं, जहाँ उत्सव हैं। जहाँ उडान है उजाश हैं। जहाँ सूर है संगीत हैं।

                    ईस धरातल पर आनंदविश्व की सहेलगाह को बहतरीन मोड देने हम तैयार ही है। क्योंकि यहाँ कही हर बात से हमसब अवगत हैं। बस ध्यान ईस बात का रखना है की हमें ईश्वर की अनंत संभावनाएँ महसूस करना है। मन को अच्छा लगें तो मन ही मन हँसना और Thanks Earth बोलना.!   मैं तो कब का तैयार हूँ।

Your thought Bird. 🐣
Dr.Brijeshkumar Chandrarav.
Modasa, Aravalli 
Gujarat,
INDIA.   
drbrijeshkumar.org
+ 91 9428312234 


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Sunday, January 1, 2023

Time Time...!!
January 01, 20231 Comments


Time is not for us, we are all for Time.

समय की रफ्तार न कोई पकड सका न समज सका हैं...!
युगों से चली आ रही काल गणना..!  कई करवटें..!



पृथ्वी के जन्म से या उससे भी पहले क्या था ?? कौन ये करतबों को आकार दे रहा हैं। कल्पनातीत घटनाएं इस ब्रह्मांड में होती रही हैं। पारस्परिक अनुबंध और मानव उत्क्रांतिक घटनाओं से ज्ञान संवर्धित होता रहा। आज हस्तांतरित एवं कंठोपकंठ ज्ञान संपदा विश्व की कई संस्कृतियाँ संजोए खड़ी हैं। हम समय की गणना करते चले लेकिन समय को अबतक पकड नहीं पाए। उसे महसूस कर पाए पर समज नहीं पाए। सही है न !?

आज विश्व वैज्ञानिक तकनीकों से समृद्ध हैं। भूतकाल के कइ भेद समझने में संशोधक सफल रहें हैं। मनुष्य ने इतिहास को बौद्धिक रूप से जानकर सामाजिक परंपराओं की समज प्राप्त की हैं। भौगोलिक घटनाओं सें जल-स्थल की ज्ञान संपदा प्राप्त की हैं। अंतरिक्ष विज्ञान व कास्मिक एनर्जी का अकल्पनीय भेद भी दृश्यमान हुआ है। लेकिन समय की आनेवाली एक क्षण को आज भी हम समझ नहीं पाए। मनुष्य के रूप में इसे विफलता समझे की कुछ और ?? नहीं ये विफलता नहीं..!!युगों से चली आ रही नियंत्रित शक्ति की सहलगाह हैं। हम इसे ईश्वर की सनातन अदृश्य यात्रा कहें या कुछ और ? मूलतःसब ईश्वरीय हैं। उसके ऐश्वर्य को आनंदित होकर अपने-आप महसूस करना है। विश्व को इस आनंदित बात का संदेश देकर मानुषीय कर्तव्य का पालन करना हैं।

आज विश्व की ज्ञान-विज्ञान की वैचारिक गहराई काफ़ी महत्वपूर्ण स्थान पर हैं। ईश्वर भी अपनी अदृश्य-अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य की खोज पर निकलें मनीषीओं की सहलगाह से खुश होंगे। ज्ञान संवर्धन के लिए बुद्धि तत्त्व भी हमें उसी शक्तिमान ईश्वर ने दिया हैं। विश्व को बुद्धिमानी के साथ संवेदनशील भी बनना होगा तभी तो हम ईश्वर की आनंद संपदा का अलौकिक स्पर्श महसूस कर पाएगें। समय अपनी अदृश्य कलाबाजी करता रहेगा। हमें समय की एक एक क्षण को जीने का अपना ही अंदाज ढूँढ निकालना होगा।


आनंदविश्व की सहलगाह एक विचार मात्र हैं। हम सब को स्वीकार है ऐसा गणमान्य विचार हैं...विश्व में आनंदप्रियता की स्वीकृति सहज हैं। ईश्वर की रंगत अमाप-असीम हैं। समय की करवटें बदलती रहेगी...! अनादिकाल से प्रतिबद्ध ईश्वर का रहस्यमय साम्राज्य स्थापित है और रहेगा। आनंदविश्व की सहेलगाह में हमें ह्रदय को प्रेममय परिभाषा से भर देना है बस...!! आपके साथ ऐसी सहलगाह के लिए मैं  डॉ.ब्रजेशकुमार भी तैयार हूँ।
09428312234, Gujarat, India.



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રજતમિલન...મારા મોડાસા નગર નિવાસની વર્ષગાંઠનો અવસર...!

મોડાસા નગર નિવાસની વર્ષગાંઠ...! 'રજતમિલન' એક ગામડાનો માણસ પચ્ચીસ વરસ પહેલાં,  '૧ મે ના 'ગુજરાત રાજ્યના સ્થાપના દિવસે' ...

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